Sushil Kumar Modi: जेपी आंदोलन में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका, इमरजेंसी के दौरान गए जेल, BJP नेता सुशील मोदी ने ऐसे तय किया था Bihar के Deputy CM तक का सफर

Sushil Kumar Modi Passes Away: सुशील कुमार मोदी पिछले कुछ दिनों से कैंसर से जूझ रहे थे. खुद को कैंसर होने की जानकारी उन्होंने अपने एक एक्स पोस्ट में 3 अप्रैल 2024 को दी थी. सुशील मोदी ने आखिरी सांस 13 मई 2024 को ली. बीजेपी के धाकड़ नेता और आंकड़ों के बाजीगर माने जाने वाले सुशील कुमार मोदी के बारे में जानिए.

Sushil Kumar Modi (File Photo: PTI)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2024,
  • अपडेटेड 8:57 AM IST
  • सुशील कुमार मोदी का जन्म 5 जनवरी 1952 को हुआ था
  • गले के कैंसर के चलते 13 मई 2024 को हो गया निधन

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) का सोमवार रात को निधन हो गया. उन्होंने 72 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. वह कैंसर से पीड़ित थे और दिल्ली AIIMS में उनका इलाज चल रहा था. बिहार के मौजूदा डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने X पर पोस्ट करके उनके निधन की जानकारी दी. भारतीय जनता पार्टी (BJP) से संबंध रखने वाली सुशील कुमार मोदी पिछले कुछ दिनों से कैंसर से जूझ रहे थे. खुद को कैंसर होने की जानकारी उन्होंने अपने एक एक्स पोस्ट में 3 अप्रैल 2024 को दी थी.

पटना में हुआ था जन्म
सुशील कुमार मोदी का जन्म 5 जनवरी 1952 को बिहार की राजधानी पटना में मोती लाल मोदी और रत्ना देवी के घर हुआ था. मारवाड़ी (वैश्य बनिया) परिवार में जन्में सुशील मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आजीवन सदस्य थे. सुशील कुमार मोदी की पत्नी जेस्सी सुशील मोदी ईसाई धर्म से हैं और प्रोफेसर हैं. उनके दो बेटे हैं जिनमें एक का नाम उत्कर्ष तथागत और दूसरे का नाम अक्षय अमृतांक्षु है. जेपी आंदोलन में छात्र नेता के रूप में उभरे सुशील कुमार मोदी ने राजनीति में करीब पांच दशक का एक लंबा सफर तय किया. सुशील कुमार मोदी ने पटना साइंस कॉलेज से बॉटनी विषय से ग्रेजुएशन किया था. 

बिहार की राजनीति में माने जाते थे बड़ा नाम
सुशील कुमार मोदी बिहार की राजनीति में बड़ा नाम माने जाते थे. राज्य में उन्हें बीजेपी का बड़ा नेता माना जाता था. सुशील मोदी लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं. वह पहली बार 1990 में बिहार विधानसभा के लिए विधायक चुने गए थे. इसके बाद 1995 और 2000 में भी विधायक चुने गए. वह लगातार तीन बार विधायक रहे. बिहार बीजेपी में बड़ी जिम्मेदारी निभानी की बात हो या पार्टी के बड़े निर्णय की उसमें सुशील मोदी की भूमिका बड़ी मानी जाती थी. सुशील मोदी ने एक खास रणनीति के तहत बिहार में बीजेपी को मजबूत करने का काम किया.

सुशील मोदी का ऐसा रहा राजनीतिक सफर 
सुशील कुमार मोदी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए थे. वह 1971 में छात्रसंघ के 5 सदस्यीय कैबिनेट के सदस्य निर्वाचित हुए थे. फिर 1973 से 1977 तक पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महामंत्री के तौर पर अपनी भूमिका निभाई थी. 1974 में जेपी आंदोलन में सुशील कुमार मोदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आपातकाल के दौरान वह जेल भी गए थे. सुशील मोदी 1983 से लेकर 86 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में प्रदेश मंत्री, प्रदेश संगठन मंत्री सहित कई पदों पर रहने के बाद 1983 में उन्हें महासचिव बनाया गया था. 

1990 में पहली बार चुने गए थे विधायक 
सुशील कुमार मोदी ने 1990 में पहली बार पटना केंद्रीय विधानसभा (अब कुम्हार विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र) से बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी. वह 1996-2004 के दौरान बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता बने रहे. उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर से जीत हासिल की थी, लेकिन बिहार में नीतीश के साथ सरकार बनाने के बाद उन्होंने संसद से इस्तीफा दे दिया था. साल 2005 में एनडीए बिहार की सत्ता में आई तो सुशील मोदी उपमुख्यमंत्री बन गए. वह दो बार बिहार के डिप्टी सीएम रहे. पहली बार 2005 से 2013 तक और दूसरी बार 2017 से 2020 तक डिप्टी सीएम का पद संभाला. इस दौरान बिहार सरकार में वित्त मंत्री भी बने रहे.

सुशील मोदी पर बीजेपी ने लगातार जताया भरोसा
सुशील मोदी पर बीजेपी ने लगातार भरोसा जताया. सुशील मोदी ने भी पार्टी की जिम्मेदारी को बिना किसी शिकायत हमेशा स्वीकार किया. सुशील मोदी को कुछ लोग आंकड़ों का बाजीगर भी कहते थे. महागठबंधन की सरकार से नीतीश कुमार के अलग होने और दूसरी बार बीजेपी के साथ सरकार बनाने में सुशील मोदी की बड़ी भूमिका मानी जाती है. एक वक्त था जब सुशील मोदी और नीतीश कुमार को राम-लक्ष्मण की जोड़ी के रूप में जाना जाता था. अपनी इस जोड़ी और दोस्ती के आधार पर सुशील मोदी ने नीतीश कुमार को महागठबंधन से अलग कर बीजेपी के साथ ला दिया.

सुशील मोदी ने 2017 में लगातार आंकड़ों के सहारे लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को घेरा जिसका नतीजा यह हुआ कि सरकार गिर गई. हालांकि, 2020 में एनडीए सरकार में सुशील मोदी को डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया. उन्हें राज्यसभा भेजकर केंद्र की राजनीति की ओर अग्रसर किया गया था. साल 2020 में रामविलास पासवान के निधन से खाली हुई राज्यसभा सीट से सुशील मोदी को राज्यसभा भेज दिया गया था. हालांकि राज्यसभा में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया. 

 

 

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