Government Scheme for Donkey Farming: अब गधा पालन पर सकार आपको देगी 50 लाख रुपए, जानें कौन-कौन होंगे इस योजना के लाभार्थी और किस तरह उठा सकते हैं लाभ

इस योजना के जरिए वह किसान जो पशुपालन, विशेष रुप से गधा प्रजनन फार्म शुरू करना चाहते हैं, ऐसे किसानों को 50 लाख रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी मिल सकती है. इस योजना में सरकार ने कुछ शर्तें भी शामिल की है, जिसके तहत दो किस्तों में सरकार पैसा देगी.

अब गधा पालन पर सरकार देगी 50 लाख रुपए, जानें शर्तें
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 06 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:11 PM IST

Government Scheme for Donkey Farming Subsidy in India देश में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है, और इन्हीं योजनाओं में से एक है National Livestock Mission. इस योजना के तहत सरकार अब आपको गधा पालन, घोड़ा पालन और ऊंट पालन जैसे व्यवसाय शुरू करने के लिए पैसे देगी, खास कर गधा पालन के लिए 50 लाख तक की आर्थिक मदद दे सकती है.


इस योजना के तहत मिलती है सब्सिडी
नेशनल लाइवस्टॉक मिशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ऐसी योजना लाती रहती है. इस योजना में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी आते हैं और इन मंत्रालय के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सरकार इस योजना के अंतर्गत कुल 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है.

हालांकि इस सब्सिडी की अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये तय की गई है. इसका उद्देश्य यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग पशुपालन से जुड़ कर व्यवसाय शुरू कर सकें , जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सके.

कौन ले सकता है इस योजना का लाभ
इस योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत किसान ही नहीं, बल्कि कई तरह के समूह भी ले सकते हैं. इसमें शामिल हैं,

  • व्यक्तिगत उद्यमी या किसान
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO)
  • स्वयं सहायता समूह (SHG)
  • संयुक्त देयता समूह (JLG)
  • सहकारी समितियां
  • सेक्शन 8 कंपनियां
  • इन सभी को सरकार की ओर से गधा प्रजनन फार्म स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जा सकती है.
  • फार्म शुरू करने के लिए जरूरी शर्तें

अगर कोई व्यक्ति इस योजना के तहत गधा प्रजनन इकाई शुरू करना चाहता है, तो उसे कुछ शर्तों को पूरा करना होगा. योजना के नियमों के अनुसार एक यूनिट में कम से कम 50 मादा गधे और 5 नर गधे होने जरूरी हैं. इसके अलावा सरकार इस योजना के तहत केवल देशी नस्लों के संरक्षण को बढ़ावा दे रही है. यानी इस योजना में मुख्य रूप से स्वदेशी नस्लों के गधों को ही शामिल किया जाएगा.

दो किस्तों में मिलती है सब्सिडी
सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी एक साथ नहीं बल्कि दो चरणों में दी जाती है. पहली किस्त तब जारी होती है जब परियोजना के लिए बैंक से लिया गया ऋण स्वीकृत हो जाता है. दूसरी किस्त तब दी जाती है जब फार्म पूरी तरह तैयार हो जाए और संबंधित अधिकारियों द्वारा उसका सत्यापन कर लिया जाए. इस प्रक्रिया के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि योजना का पैसा सही तरीके से उपयोग हो.

क्यों बढ़ावा दे रही है सरकार गधा पालन को
सरकार का मानना है कि देश में गधों की संख्या तेजी से कम होती जा रही है. 20वीं पशुधन जनगणना (2019) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में गधों की संख्या लगभग 1.23 लाख रह गई थी. यह संख्या 2012 की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत कम हो गई है. पहले गधों का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में सामान ढोने और निर्माण कार्यों में काफी होता था. लेकिन मशीनों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण इनकी मांग कम हो गई, जिससे इनकी संख्या भी लगातार घटती चली गई. सरकार चाहती है कि आर्थिक सहायता देकर लोगों को इस क्षेत्र में निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि देशी नस्लों का संरक्षण भी हो और किसानों की आय भी बढ़ सके.

पशुपालकों के लिए सरकार की अन्य योजनाएं
गधा पालन के अलावा भी सरकार पशुपालकों के लिए कई योजनाएं चला रही है. इनमें से एक है पशु किसान क्रेडिट कार्ड (Pashu Kisan Credit Card) योजना. इसके तहत छोटे पशुपालक 1.6 लाख रुपये तक का लोन बिना किसी गारंटी के प्राप्त कर सकते हैं. कुछ कंडिशन में इस पर ब्याज दर भी कम रखी जाती है.

इसके अलावा राष्ट्रीय गोकुल मिशन (Rashtriya Gokul Mission) भी चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देशी गाय और भैंस की नस्लों को बढ़ावा देना है. इस योजना के तहत प्रजनन केंद्रों को वित्तीय सहायता और कृत्रिम गर्भाधान जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.

ग्रामीण आय बढ़ाने पर है सरकार का फोकस
सरकार की इन योजनाओं का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आय बढ़ाना, पशुपालन को आधुनिक बनाना और देशी पशु नस्लों को सुरक्षित रखना है. अगर कोई किसान या उद्यमी पशुपालन के क्षेत्र में नया व्यवसाय शुरू करना चाहता है, तो नेशनल लाइवस्टॉक मिशन जैसी सेवाएं उनके लिए एक अच्छा अवसर साबित हो सकती हैं.

 

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