दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है. कल यानी 21 अक्टूबर को AQI 300 से ऊपर का रहा. ये पिछले 100 दिनों की सबसे खराब हालत है. आज भी एक्यूआई ढाई सौ के ऊपर है. जब AQI 201 से 300 के बीच होती है यानी खराब स्थिति में होती है तो GRAP-1 लागू होता है. इस तरह से दिल्ली में ग्रैप-1 लागू हो गया है. अब दिल्ली में कई तरह की पांबदियां काम करने लगी हैं. चलिए आपको बताते हैं कि ग्रैप-1 में किन चीजों पर पाबंदी रहती है.
GRAP-1 में क्या बदलता है?
जब हवा की क्वालिटी खराब होती है तो ग्रैप-1 लागू किया जाता है. इसके साथ ही कई तरह की पाबंदियां भी लागू होती है. दिल्ली में ग्रैप-1 लागू होने के बाद कई चीजों में बदलाव होगा. पॉल्यूशन फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्ती बढ़नी शुरू हो जाएगी. ग्रैप-1 में कंस्ट्रक्शन का काम बंद हो जाएगा. इसके साथ ही होटल, रेस्टोरेंट और खुले खाने-पीने की दुकानों पर तंदूर के लिए कोयला और लकड़ी का इस्तेमाल बंद हो जाएगा. इतना ही नहीं, डीजल जनरेटर का भी इस्तेमाल नहीं होगा. दिल्ली में कंस्ट्रक्शन और तोड़फोड़ के कामों पर रोक रहेगी. खुले में जलाने पर पाबंदी है.
मेट्रो पार्किंग सुविधाओं को छोड़कर पूरी दिल्ली में पार्किंग चार्ज दोगुना कर दिया जाएगा. दिल्ली सरकार और एमसीडी के ऑफिसों के लिए काम के घंटे अलग-अलग होंगे. गाड़ियों की आवाजाही कम की जाएगी. वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था की जाएगी.
ग्रैप-1 में नागरिकों को क्या करना चाहिए-
सरकार की तरफ से ग्रैप-1 में नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी है. इसके तहत नागरिकों को कई तरह के सुझाव दिए जाते हैं. नागरिकों को इन कामों को करना चाहिए.
GRAP का कौन सा स्टेज कब लागू होगा?
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) दिल्ली-एनसीआर में पॉल्यूशन से निपटने के लिए लागू किया जाता है. अगर AQI 201 से 300 तक रहता है तो ग्रैप-1 लागू होता है. अगर AQI 301 से 400 तक रहता है तो ग्रैप-2 लागू होता है. अगर AQI 401 से 500 तक रहता है तो ग्रैप-3 लागू होता है. और सबसे अंत में जब स्थिति अत्यंत गंभीर हो जाती है तो ग्रैप-4 लागू होता है. इसमें एक्यूआई 450 से ऊपर होता है.
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