Advertisement

10 हजार में से करीब 600 सीटों पर जीत... गुजरात में AAP का मुख्य विपक्ष बनने का सपना टूटा

गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. आम आदमी पार्टी को विश्वास था कि वह भाजपा के खिलाफ मुख्य विपक्षी साबित होगी, जिसे 7 बजे के आए आंकड़ों ने पूरी तरह खारिज कर दिया है.

Arvind Kejriwal
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:24 PM IST

गुजरात में अगले साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले स्थानीय निकाय चुनावों को सेमीफाइनल माना जा रहा था. अब इन चुनावों के नतीजों ने राज्य की सियासत की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है. शाम 7 बजे तक चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार आम आदमी पार्टी को कुल 574 सीटें मिली हैं. हालांकि दोपहर में काउंटिंग के दौरान पार्टी ने दावा किया था कि वह गुजरात में दूसरे नंबर पर है और कांग्रेस तीसरे स्थान पर चली गई है, लेकिन शाम होते-होते तस्वीर बदल गई और AAP तीसरे नंबर पर सिमटती नजर आई.

सीटों के आंकड़ों ने खोली हकीकत
चुनाव आयोग के शाम 7 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, 15 नगर निगमों की 1044 सीटों में से आम आदमी पार्टी को सिर्फ 6 सीटें मिली हैं. वहीं 84 नगरपालिकाओं की 2030 सीटों में से पार्टी केवल 18 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी. इसके अलावा 34 जिला पंचायतों की 1090 सीटों में से AAP को 57 सीटें मिली हैं, जबकि 260 तालुका पंचायतों की 5234 सीटों में से पार्टी 395 सीटों पर जीत हासिल कर सकी. कुल मिलाकर पार्टी के खाते में 574 सीटें आई हैं. ये आंकड़े भले ही शाम 7 बजे तक के हों, लेकिन उन्होंने पार्टी के बड़े-बड़े दावों की हवा निकाल दी है.

सूरत से शुरू हुआ सफर, सूरत में ही झटका
साल 2021 के स्थानीय निकाय चुनाव में सूरत नगर निगम की 120 सीटों में से 27 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी ने सभी को चौंका दिया था. उसी जीत के बाद पार्टी ने गुजरात में कांग्रेस की जगह खुद को भाजपा के मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश करना शुरू कर दिया था.

लेकिन पांच साल के भीतर हालात बदल गए. पहले पार्टी के 12 पार्षद भाजपा में शामिल हो गए और अब 2026 के चुनाव में पार्टी सूरत नगर निगम में सिर्फ 4 सीटों पर सिमट गई. नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष पायल साकरिया भी चुनाव हार गईं, वहीं प्रदेश महासचिव मनोज सोरठिया को भी हार का सामना करना पड़ा.
जिस सूरत के दम पर पार्टी गुजरात में अपनी मजबूत जमीन बनाने का सपना देख रही थी, वहीं से उसे सबसे बड़ा झटका मिला है.

राहत की बात भी रही
हालांकि पार्टी के लिए कुछ राहत की खबर भी है. आदिवासी इलाकों में AAP अभी भी कांग्रेस से ज्यादा मजबूत नजर आई है. विधायक चैतर वसावा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी जिला पंचायत और 5 तालुका पंचायत जीतने में सफल रही. वहीं दूसरे विधायक गोपाल इटालिया की वजह से सौराष्ट्र क्षेत्र में 2 तालुका पंचायतों के साथ कुछ अन्य सीटों पर भी जीत मिली है.

विधानसभा चुनाव की राह मुश्किल
फिलहाल पार्टी ने जनता के जनादेश को स्वीकार करते हुए कहा है कि वह सूरत समेत पूरे गुजरात में और ज्यादा मेहनत करेगी. लेकिन मौजूदा आंकड़े साफ बता रहे हैं कि आम आदमी पार्टी अभी मुख्य विपक्ष बनने से भी काफी दूर है. स्थानीय नेतृत्व के दम पर कुछ जिलों और पॉकेट्स में पार्टी मजबूत जरूर दिख रही है, लेकिन राज्यव्यापी स्तर पर उसका प्रभाव सीमित नजर आ रहा है. ऐसे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में सत्ता तक पहुंचने की राह पार्टी के लिए फिलहाल काफी मुश्किल दिखाई दे रही है.


(रिपोर्ट- ब्रजेश दोशी)

ये भी पढ़ें 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement