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हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला... घटेंगे IAS, IPS और IFS के पद, हर साल 200 करोड़ रुपये बचाने की तैयारी!

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. सरकार अब IAS, IPS और IFS अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या कम करने जा रही है.

Shimla CM Sukhu
विकास शर्मा
  • शिमला,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:04 AM IST

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. सरकार अब IAS, IPS और IFS अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या कम करने जा रही है. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में बताया कि राज्य में जरूरत के मुताबिक प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और अनावश्यक पदों में कटौती की जाएगी.

IAS के 153 पद घटकर होंगे 130
मुख्यमंत्री के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में IAS के 153 स्वीकृत पदों को घटाकर 130 किया जा रहा है. इसी तरह IFS के 118 पदों को घटाकर 83 किया जाएगा. IPS कैडर के 96 स्वीकृत पदों में भी कटौती की जा रही है. सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक खर्च कम होगा और सरकारी व्यवस्था ज्यादा प्रभावी बनेगी. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों की फाइलों को जल्द क्लीयरेंस दिया जाएगा. इससे अधिकारियों को केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाने में अनावश्यक देरी नहीं होगी.

सरकार को हर साल 200 करोड़ की बचत की उम्मीद
सरकार का अनुमान है कि प्रशासनिक पदों और फिजूलखर्ची में कटौती से हर साल करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को बड़ी संख्या में सिर्फ कागजी अफसरों की जरूरत नहीं है. सरकार ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करना चाहती है, जो योजनाओं को तेजी से जमीन पर लागू कर सके. इससे पहले 11 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री ने बताया था कि IFS के स्वीकृत पद 110 से घटाकर 86 किए गए हैं. उन्होंने दावा किया था कि सरकार के सुधारों, नीतिगत बदलावों और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की कोशिशों से पिछले तीन वर्षों में करीब 3,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है.

2024 में बनी थी कैबिनेट सब कमेटी
अधिकारियों की संख्या कम करने और सरकारी कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 2024 में कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया गया था. तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने उस समय कहा था कि राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा लोन की किस्त और ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है. उन्होंने सरकारी विभागों में अधिकारियों के युक्तिकरण को समय की जरूरत बताया था. मंत्री के अनुसार 2006 से 2022 के बीच 16 वर्षों में क्लास वन यानी गजेटिड अधिकारियों की संख्या 62 प्रतिशत बढ़ी. अब सरकार अधिकारियों की संख्या कम कर जरूरत के मुताबिक फील्ड और लोअर स्टाफ बढ़ाने पर जोर देगी. हालांकि, कैडर में कटौती का प्रशासनिक कामकाज पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा.

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