आज के दौर में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ने बातचीत को जितना आसान बनाया है, उतना ही आसान किसी को परेशान करना भी हो गया है. कई मामलों में बातचीत नॉर्मल रूप से शुरू होती है, लेकिन जब सामने वाला बात करने से मना कर दे और फिर भी लगातार कॉल, देर रात मैसेज या वीडियो कॉल आने लगें, तो यह सीधा मानसिक उत्पीड़न बन जाता है. अक्सर लोग इसे नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं, लेकिन यही चुप्पी आगे चलकर परेशानी को और बढ़ा देती है.
कानून की नज़रों में जबरन लगातार कॉल, मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए संपर्क बनाए रखना केवल बदतमीजी नहीं, बल्कि कानूनी अपराध है. अगर कोई व्यक्ति महीनों से आपको फोन या मैसेज करके परेशान कर रहा है, तो यह आपकी प्राइवेसी और सुरक्षा पर हमला माना जाता है. कानून ऐसे मामलों को गंभीरता से लेता है, इसलिए समय पर कार्रवाई जरूरी है.
जबरन संपर्क मतलब स्टॉकिंक
अगर किसी महिला के मना करने के बाद भी कोई व्यक्ति कॉल, मैसेज, वीडियो कॉल या सोशल मीडिया के जरिए संपर्क करता रहता है, तो इसे कानून में स्टॉकिंक कहा जाता है. भारतीय न्याय संहिता के तहत यह सीधा अपराध है. पहले यही प्रावधान आईपीसी की धारा 354D में था.
सजा क्या हो सकती है?
अगर कोई स्टॉकिंक का दोषी पाया जाता है तो आरोपी को तीन साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. जब एक बार साफ मना कर दिया जाए, उसके बाद भी मैसेज आएं, तो यह अपराध की कैटेगरी में गिना जाने लगता है. अगर यह सब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हो रहा है, तो मामला साइबर हैरेसमेंट बनकर और गंभीर हो जाता है।
क्या कदम है जरूरी?
कानूनी कार्रवाई के लिए सबूत बेहद जरूरी होते हैं. इसलिए मैसेज के स्क्रीनशॉट, कॉल हिस्ट्री, वॉयस नोट, सोशल मीडिया चैट, और कॉल रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखें. ये सभी चीजें शिकायत के समय आपके काम आती हैं.
कहां और कैसे करें शिकायत?
इसकी शिकायत आप नजदीकी पुलिस स्टेशन या महिला थाना में कर सकती हैं. अगर थाने जाना संभव न हो, तो National Cyber Crime Reporting Portal पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है. इसके अलावा महिला हेल्पलाइन 1090 पर कॉल कर सहायता लें सकती हैं. आपात स्थिति में 112 डायल कर तुरंत मदद पाई जा सकती है. शिकायत मिलते ही पुलिस नंबर ट्रैक करती है, आरोपी को बुलाया जाता है और जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जाती है.