India's first Semi High Speed Rail: भारत की पहली सेमी हाई-स्पीड रेल को मिली मंजूरी... ₹20,667 करोड़ लागत में बनेगी, अब सफर होगा आसान

लगभग ₹20,667 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना भारतीय रेलवे की पहली स्वदेशी तकनीक आधारित सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना होगी. इस परियोजना से गुजरात में रेल कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी और अहमदाबाद से धोलेरा तक सफर पहले से कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगा.

India's first SEMI High-Speed Rail
gnttv.com
  • अहमदाबाद,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:01 PM IST

प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने अहमदाबाद (सरखेज) से धोलेरा तक सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन रेलवे परियोजना को मंजूरी दे दी है. लगभग ₹20,667 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना भारतीय रेलवे की पहली स्वदेशी तकनीक आधारित सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना होगी. इस परियोजना से गुजरात में रेल कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी और अहमदाबाद से धोलेरा तक सफर पहले से कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक हो जाएगा.

134 किलोमीटर लंबी होगी नई रेल लाइन
करीब 134 किलोमीटर लंबी यह नई रेलवे लाइन अहमदाबाद, धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR), आगामी धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर को आधुनिक रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी. परियोजना पूरी होने के बाद अहमदाबाद और धोलेरा के बीच यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी. यात्रियों को एक ही दिन में आने-जाने की सुविधा आसानी से मिल सकेगी.

स्वदेशी तकनीक से बनेगी नई पहचान
रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा कि अहमदाबाद-धोलेरा सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नई शुरुआत है. उन्होंने कहा कि यह केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि आधुनिक, तेज और आत्मनिर्भर भारत की पहचान बनेगी. उनका कहना है कि स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह परियोजना भविष्य में देशभर में सेमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार का आधार तैयार करेगी.

उद्योग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
अहमदाबाद मंडल के मंडल रेल प्रबंधक Ved Prakash ने कहा कि यह परियोजना गुजरात के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देगी. इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा सुविधा मिलेगी. साथ ही रोजगार, उद्योग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बड़ा लाभ पहुंचेगा. उन्होंने बताया कि परियोजना से धोलेरा सीधे अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से जुड़ जाएगा और दोनों शहरों के बीच दूरी एक घंटे से भी कम समय में तय की जा सकेगी.

पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार
प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार इस परियोजना से लगभग 284 गांवों और करीब 5 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा. भारतीय रेलवे के अनुसार परियोजना से लगभग 0.48 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और करीब 2 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी. यह लाभ लगभग 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर माना जा रहा है. परियोजना को वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

रिपोर्टर: अतुल तिवारी

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