मृत मां को सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा रख हड़प लिए 6.30 लाख रुपए, गर्लफ्रेंड और बैंककर्मी के साथ मिलकर रचा था खेल

जयपुर में एक बेटे ने फर्जी जीवित प्रमाण पत्र बनवाकर मृत मां के नाम पर 6.30 लाख रुपए की पेंशन निकाली. पुलिस ने बेटे, उसकी गर्लफ्रेंड और बैंककर्मी को गिरफ्तार किया.

मृत मां के नाम पर ठगी
gnttv.com
  • जयपुर,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:26 PM IST

राजस्थान की राजधानी जयपुर से धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि एक बेटे ने अपनी मृत मां को सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा दिखाकर नगर निगम की पेंशन के करीब 6.30 लाख रुपए हड़प लिए. इस पूरे मामले में उसकी गर्लफ्रेंड और एसबीआई के तत्कालीन बैंक कर्मचारी की भी भूमिका सामने आई है. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है.

मां की मौत के बाद भी जारी रही पेंशन
जवाहर नगर थाना प्रभारी सरला यादव के अनुसार, आरोपी लालचंद की मां शांति देवी का निधन 2 मई 2021 को हो गया था. इसके बावजूद उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में जीवित दिखाने के लिए फर्जी जीवित प्रमाण पत्र तैयार कराया गया. इसी दस्तावेज के आधार पर नगर निगम की पेंशन लगातार उनके बैंक खाते में आती रही.

गर्लफ्रेंड और बैंक कर्मचारी की मिलीभगत का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया कि लालचंद ने अपनी गर्लफ्रेंड खुशबू दीक्षित उर्फ नेहा के साथ मिलकर पूरी साजिश रची. आरोप है कि एसबीआई के तत्कालीन बैंक कर्मचारी सिराज अहमद कुरैशी ने भी इस फर्जीवाड़े में सहयोग किया. तीनों की कथित मिलीभगत से पेंशन खाते में आती रही और एटीएम समेत अन्य माध्यमों से करीब 6.30 लाख रुपए निकाल लिए गए.

बैंक की शिकायत से खुला पूरा मामला
इस धोखाधड़ी का खुलासा 9 जनवरी को हुआ, जब एसबीआई की राजापार्क शाखा के प्रबंधक तपिश श्रीवास्तव ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और नगर निगम से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र की पड़ताल की. जांच में पुष्टि हुई कि शांति देवी की मृत्यु वर्ष 2021 में ही हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम पर पेंशन जारी रही.

तीनों आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी लालचंद, उसकी गर्लफ्रेंड खुशबू दीक्षित उर्फ नेहा और एसबीआई के तत्कालीन बैंक कर्मचारी सिराज अहमद कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया. तीनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी और सरकारी रिकॉर्ड में फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए गए.
(रिपोर्ट- विशाल शर्मा)
 

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