16 साल से कम उम्र के बच्चों को डिजिटल लत से फ्री करने के लिए टास्क फोर्स गठित, अगले सत्र से पहले देगी रिपोर्ट

महाराष्ट्र सरकार ने 16 साल से कम आयु के बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत से मुक्त करने के लिए टास्क फोर्स गठित की गई. ये टास्क फोर्स अगला सत्र शुरू होने से पहले रिपोर्ट देगी.

How to keep kids safe online
gnttv.com
  • मुंबई,
  • 26 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:52 PM IST

महाराष्ट्र सरकार ने 16 साल से कम आयु के बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर गंभीर रुख अपनाया है. इस संबंध में सरकार ने एक विशेष 'टास्क फोर्स' का गठन किया है, जो बच्चों को सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की लत से मुक्त करने के उपाय सुझाएगी. यह जानकारी राज्य के सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री आशीष शेलार ने विधान परिषद में दी.

मंत्री शेलार ने बताया कि टास्क फोर्स को निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाएंगे और अगला अधिवेशन शुरू होने से पहले रिपोर्ट सौंपने का लक्ष्य रखा गया है.

सोशल मीडिया के प्रभाव का अध्ययन- 
सोशल मीडिया और गेमिंग के प्रभावों का अध्ययन टास्क फोर्स 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों में सोशल मीडिया और गेमिंग के उपयोग का स्वरूप और उसका प्रमाणिक आकलन करेगी. इसके साथ ही मानसिक, शारीरिक और शैक्षणिक प्रभावों का भी विस्तृत अध्ययन किया जाएगा.

सुझाव देगी कमेटी-
यह समिति डिजिटल विज्ञापन, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नियामक ढांचे का अध्ययन कर आवश्यक कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक उपाय सुझाएगी. सरकार सोशल मीडिया और गेमिंग के अनियंत्रित उपयोग पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की तैयारी में है.

आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर चिंता-
विधान परिषद में भाजपा विधायक निरंजन डावखरे और संजय केणेकर ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि मोबाइल और ऑनलाइन गेमिंग की अति के कारण बच्चों और युवाओं में मानसिक तनाव और आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं.

डावखरे ने मांग की कि आत्महत्या के लिए उकसाने वाले मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही आपत्तिजनक और हानिकारक ऐप्स पर प्रतिबंध लगाकर उनके मूल निर्माताओं के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं.

इस पर जवाब देते हुए मंत्री शेलार ने कहा कि सोशल मीडिया पर नियंत्रण केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए इस विषय पर केंद्र के साथ समन्वय कर ठोस कदम उठाए जाएंगे.

फर्जी और भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई की चेतावनी-
मंत्री शेलार ने बताया कि राज्य में 18 वर्ष से कम आयु के लगभग 4 करोड़ बच्चे हैं, जिनमें से करीब 3 करोड़ बच्चे 15 वर्ष से कम आयु के हैं. ऐसे में उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का प्रश्न अत्यंत गंभीर सार्वजनिक महत्व का विषय है. उन्होंने जानकारी दी कि 2 फरवरी 2026 को राज्य सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग के संदर्भ में विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है.

साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अश्लील, भ्रामक, आपराधिक या फर्जी विज्ञापनों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है.

सरकार का कहना है कि बच्चों और किशोरों को डिजिटल लत से बचाने के लिए आवश्यक सभी कानूनी और प्रशासनिक उपाय किए जाएंगे.

(दिनेश त्रिपाठी की रिपोर्ट)

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