Advertisement

Nagpur ICICI Bank Fake Gold Loan Scam: सामने आया ICICI बैंक का 23 करोड़ से अधिक का गोल्ड लोन घोटाला, नकली सोने के बदले लेता था आरोपी असली नोट

नागपुर ईओडब्ल्यू ने ICICI बैंक की विभिन्न शाखाओं में फर्जी सोना गिरवी रखकर 23.31 करोड़ रुपए से अधिक का लोन लेने वाले घोटाले के मास्टरमाइंड सचिन राऊत को गिरफ्तार कर लिया है. जांच में 152 फर्जी लोन खाते और 7 आरोपी पकड़े गए हैं.

Nagpur ICICI Bank Fake Gold Loan Scam
योगेश पांडे
  • नागपुर,
  • 30 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:09 AM IST

नागपुर में फर्जी सोने के गहने गिरवी रखकर करोड़ों रुपये का गोल्ड लोन लेने के मामले में आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW को बड़ी सफलता मिली है. ICICI बैंक की अलग-अलग शाखाओं में सामने आए इस कथित घोटाले के मास्टरमाइंड सचिन राऊत को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. जांच में अब तक 152 गोल्ड लोन खातों में अनियमितता सामने आई है और कथित धोखाधड़ी की रकम 23 करोड़ 31 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है. इस मामले में अब तक सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

ऑडिट के दौरान हुआ मामले का खुलासा
मामले का खुलासा 18 अक्टूबर 2025 को गोल्ड लोन खातों के ऑडिट के दौरान हुआ. एक खाते में गिरवी रखे गए सोने के गहनों की शुद्धता को लेकर संदेह पैदा हुआ था. इसके बाद EOW ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए मनीष नगर, मेडिकल चौक, नरसाला, काटोल रोड, अजनी चौक, छत्रपति चौक, वर्धा रोड, प्रतापनगर और नंदनवन स्थित ICICI बैंक की शाखाओं के गोल्ड लोन खातों की जांच शुरू की. जांच आगे बढ़ी तो कुल 152 गोल्ड लोन मामलों में कथित अनियमितताएं सामने आईं.

सचिन राऊत को बताया जा रहा मास्टरमाइंड
EOW की जांच के मुताबिक, इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड सचिन राऊत बताया जा रहा है. राऊत ने साल 2018-19 में खुद ICICI बैंक से गोल्ड लोन लिया था और बाद में अपने कर्ज की सीमा भी बढ़वाई थी. आरोप है कि इसके बाद वह कथित तौर पर फर्जी गोल्ड लोन ग्राहकों की व्यवस्था करने लगा. जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि अलग-अलग शाखाओं में इस नेटवर्क को किस तरह मदद मिली और लोन मंजूर कराने की पूरी प्रक्रिया कैसे संचालित की गई.

अप्रेजर नंदू खरवडे की भूमिका भी जांच के घेरे में
इस मामले में गहनों का मूल्यांकन करने वाले अप्रेजर नंदू खरवडे की भूमिका भी जांच के घेरे में है. आरोप है कि उसने 155 नकली सोने के गहनों को असली सोना बताते हुए प्रमाणित किया. जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर प्रत्येक मूल्यांकन रिपोर्ट के बदले उसे पांच हजार रुपये मिलते थे. इतना ही नहीं, खरवडे पर अपने मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों समेत 38 कथित फर्जी ग्राहकों की पहचान उपलब्ध कराने का भी आरोप है.

CDR और बैंक खातों की भी हुई जांच
EOW ने संदिग्ध बैंक खातों के लेन-देन के साथ आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR की भी जांच की. जांच एजेंसी के मुताबिक, इससे कर्ज लेने वालों, ज्वेलरी अप्रेजर और बैंक से जुड़े लोगों के बीच संपर्क की जानकारी सामने आई. इसके बाद आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी कर मोबाइल फोन, लैपटॉप, वाहन, बैंक से जुड़े दस्तावेज और कथित फर्जी गोल्ड लोन ग्राहकों की सूचियां जब्त की गईं.

बैंक अधिकारियों से लेकर ऑडिटरों तक जांच
जांच का दायरा अब बैंक अधिकारियों, गोल्ड लोन विभाग के कर्मचारियों, अप्रेजर और ऑडिटरों तक पहुंच गया है. EOW यह पता लगाने में जुटी है कि लोन मंजूर करते समय नियमों का पालन किया गया था या नहीं और कथित नकली गहने बार-बार मूल्यांकन प्रक्रिया में असली सोना बनकर कैसे पास होते रहे. साथ ही, इन गहनों के आधार पर लाखों-करोड़ों रुपये के लोन आखिर कैसे मंजूर किए गए, इसकी भी जांच की जा रही है.

ऑडिटरों की भूमिका पर भी सवाल
मामले में ऑडिटरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. आरोप है कि गोल्ड लोन जारी होने के करीब तीन महीने बाद खातों का ऑडिट करने वाले प्रमोद टेटे, राजेंद्र शिलंकार और धनंजय धोंमणे ने भी कथित तौर पर पैसों के बदले नकली गहनों को असली सोना बताते हुए रिपोर्ट दी. EOW अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस कथित घोटाले में और कितने लोगों की भूमिका रही है.

सात आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
फिलहाल इस मामले में मास्टरमाइंड बताए जा रहे सचिन राऊत समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. 152 गोल्ड लोन खातों में सामने आई कथित गड़बड़ी और 23 करोड़ 31 लाख रुपये से ज्यादा की रकम को लेकर EOW की जांच जारी है. जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में बैंक से जुड़े और लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है.
 

ये भी पढ़ें

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement