महाराष्ट्र के रहने वाले इन सभी पर्यटकों के लिए रेलवे ने किया विशेष इंतजाम,
महाराष्ट्र के रहने वाले इन सभी पर्यटकों के लिए रेलवे ने किया विशेष इंतजाम,
नेपाल में आई जल प्रलय के बाद काठमांडू में फंसे महाराष्ट्र के 106 पर्यटकों को सरकारी मदद से सुरक्षित भारत लाया गया. सड़क मार्ग से सीतामढ़ी और पटना पहुंचे पर्यटकों को रेलवे ने स्पेशल कोच लगाकर उनके घर भेजने की व्यवस्था की. पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर यात्रियों को खाना, फल, पानी और मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं.
रास्ते बंद होने से काठमांडू में फंसे थे पर्यटक
नेपाल में आई अचानक बाढ़ और जल प्रलय ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है. इस त्रासदी का असर वहां घूमने गए भारतीय पर्यटकों पर भी पड़ा. महाराष्ट्र के नागपुर और पुणे के रहने वाले 106 पर्यटकों का दल नेपाल घूमने गया था. ये लोग पहले पोखरा पहुंचे और इसके बाद 23 अगस्त से काठमांडू में ठहरे हुए थे. इन्हें 27 अगस्त को वापस लौटना था, लेकिन आपदा के बाद कई रास्ते बंद हो गए और उनकी वापसी मुश्किल हो गई.
पर्यटकों ने महाराष्ट्र सरकार और स्थानीय जन प्रतिनिधियों से संपर्क किया. इसके बाद उन्हें नेपाल से सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई. छोटी गाड़ियों की मदद से पर्यटकों को पहाड़ी रास्तों से होते हुए सीतामढ़ी बॉर्डर तक लाया गया. वहां बिहार प्रशासन ने भी उनकी मदद की और उन्हें पटना पहुंचाया गया.
पटना से ट्रेन में लगाए गए दो स्पेशल कोच
पटना पहुंचने के बाद भारतीय रेलवे ने इन पर्यटकों की घर वापसी के लिए विशेष व्यवस्था की. पटना से पूर्णा जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन में दो थर्ड एसी के स्पेशल कोच लगाए गए. इन्हीं कोच में महाराष्ट्र के सभी पर्यटकों को बैठाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया. जब ट्रेन पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंची तो रेलवे अधिकारियों और महिला मंडल कल्याण समिति की टीम ने यात्रियों का स्वागत किया. यात्रियों को खाने-पीने का सामान, फल, पानी और चाय उपलब्ध कराई गई. जिन यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी थी, उन्हें डॉक्टरों की टीम ने मेडिकल सुविधा और दवाइयां भी दीं.
पर्यटकों ने सुनाई आपदा के दौरान की आपबीती
नागपुर के रहने वाले जयराम दुबे ने बताया कि उनका करीब 110 लोगों का ग्रुप था. आपदा के बाद सभी रास्ते बंद हो गए थे और वापसी के लिए बुक की गई गाड़ियां भी कैंसिल हो गई थीं. स्थानीय विधायक और प्रशासन की मदद से किसी तरह उन्हें नेपाल से बाहर निकाला गया. एक अन्य पर्यटक रमेश बाजपेई ने बताया कि बड़े वाहनों के रास्ते बंद होने के कारण उन्हें पहाड़ी रास्तों से छोटी गाड़ियों में निकलना पड़ा. वहीं आशा पांडे ने बताया कि पहाड़ों पर चारों तरफ पानी और तेज बारिश थी. बिजली चमक रही थी और सभी लोग डरे हुए थे कि कहीं रास्ते में बस हादसे का शिकार न हो जाए.
रेलवे ने भी निभाई अहम भूमिका
पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेल मंडल के डीआरएम उदय सिंह मीना ने बताया कि भारत सरकार की विशेष मुहिम के तहत इन पर्यटकों को नेपाल से वापस लाया गया है. रेलवे ने भी इस अभियान में सहयोग करते हुए पटना से दो थर्ड एसी कोच लगाए. उन्होंने बताया कि यात्रियों के लिए खान-पान और मेडिकल सुविधा की व्यवस्था की गई, ताकि उन्हें अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके.
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