Asansol News
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बाजार में चीनी समेत कई जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच कालाबाजारी और अवैध जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने रानीगंज में अभियान चलाया है. शनिवार को रानीगंज में चीनी और खाद्य सामग्री के कई थोक कारोबारियों के गोदामों और दुकानों पर संयुक्त रूप से जांच की गई. इस अभियान में आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नर, जिला प्रशासन, खाद्य विभाग, कृषि विपणन विभाग, कंज्यूमर अफेयर्स और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल रहे. अभियान में डीसी सेंट्रल ध्रुव दास के साथ रानीगंज थाने के अधिकारी भी मौजूद रहे.
क्यों की गई छापेमारी?
प्रशासन के मुताबिक, बाजार में जरूरी सामान की कीमतें अचानक क्यों बढ़ रही हैं, कहीं किसी कारोबारी की ओर से अवैध तरीके से स्टॉक तो नहीं किया जा रहा और कृत्रिम कमी पैदा कर कीमतें तो नहीं बढ़ाई जा रहीं. इन तमाम पहलुओं की जांच की जा रही है. डीसी सेंट्रल ध्रुव दास ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जरूरी सामानों की कीमत और स्टॉक की निगरानी के लिए टास्क फोर्स बनाई गई है. यह टीम लगातार अलग-अलग बाजारों में जाकर जांच कर रही है. रानीगंज में खास तौर पर चीनी के थोक कारोबारियों और गोदामों में जाकर स्टॉक की जांच की गई. अधिकारियों ने यह भी देखा कि कारोबारी ने निर्धारित सीमा से अधिक चीनी तो जमा नहीं कर रखी है और चीनी किस कीमत पर खरीदी और किस कीमत पर बेची जा रही है.
5 जगहों पर हुई जांच
प्रशासन के मुताबिक, शनिवार को अब तक रानीगंज में करीब पांच जगहों पर जांच की गई। डिप्टी डायरेक्टर, राशनिंग बाबुल चंद्र भक्त ने बताया कि मुख्य रूप से चीनी के थोक कारोबारियों के यहां जाकर स्टॉक और बिक्री की कीमतों की जांच की गई. उन्होंने बताया कि सरकारी नियमों के तहत चीनी के स्टॉक की निर्धारित सीमा भी देखी जा रही है. उनके मुताबिक, 4,000 क्विंटल तक स्टॉक रखने की सीमा के नियम की जांच की जा रही है. कहीं इससे अधिक स्टॉक तो नहीं है, इसकी पड़ताल जारी है.
अब तक बड़ी गड़बड़ी नहीं मिली
डीसी सेंट्रल ध्रुव दास ने कहा कि जांच अभी जारी है और फिलहाल ऐसी कोई बड़ी गड़बड़ी सामने नहीं आई है, जिसके बारे में तत्काल कार्रवाई की बात कही जा सके. हालांकि, जांच पूरी होने के बाद अगर नियमों का उल्लंघन या अवैध जमाखोरी सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि आम लोगों को किसी भी बेईमान कारोबारी की वजह से परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए आने वाले दिनों में भी इस तरह की जांच जारी रहेगी.
कारोबारियों ने भी रखी अपनी बात
वहीं, कुछ कारोबारियों ने प्रशासन की कार्रवाई के तरीके को लेकर अपनी आपत्ति जताई. उनका कहना है कि अगर किसी कारोबारी ने ज्यादा कीमत पर सामान बेचता है या तय सीमा से ज्यादा स्टॉक रखा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन बड़ी संख्या में पुलिस और अधिकारियों के साथ छापेमारी करने से आसपास के लोगों में अनावश्यक डर का माहौल बन सकता है. कारोबारियों का दावा है कि मौजूदा समय में ज्यादातर खरीद-बिक्री और स्टॉक का रिकॉर्ड कंप्यूटर पर रखा जाता है. दुकानों पर पुराने समय की तरह स्टॉक से जुड़े बोर्ड नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि स्टॉक का रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. कारोबारियों ने प्रशासन से अपील की कि जांच और कार्रवाई जरूर हो, लेकिन इसका तरीका ऐसा हो जिससे छोटे बाजारों और आम लोगों के बीच अनावश्यक पैनिक न फैले.
आगे भी जारी रहेगा अभियान
प्रशासन ने साफ किया है कि जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमत, स्टॉक और सप्लाई पर निगरानी जारी रहेगी. चीनी के अलावा अन्य जरूरी खाद्य सामग्री में भी अगर अवैध जमाखोरी या कृत्रिम कमी पैदा करने की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच की जाएगी.
रिपोर्टर: अनिल गिरी
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