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New Rules for Birth and Death Registration: ध्यान दें! बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन का नया नियम 1 अक्टूबर से होगा लागू, बनवाने में देरी की तो काटना होगा कोर्ट का चक्कर, जानें ये दोनों सर्टिफिकेट क्यों हैं जरूरी?

बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट दोनों को बनवाना जरूरी होता है. जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला है. यदि आपने अब इन दोनों सर्टिफिकेट को बनवाने में देरी की तो आपको कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ सकता है.

Birth certificate
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:39 AM IST

बर्थ सर्टिफिकेट (Birth Certificate) यानी जन्म प्रमाण पत्र और डेथ सर्टिफिकेट (Death Certificate) यानी मृत्यु प्रमाण पत्र दोनों ही बहुत जरूरी दस्तावेज है. किसी बच्चे के जन्म पर जन्म प्रमाण पत्र बनवाना होता है. किसी की मौत होने पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना होता है. बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कई जगहों पर किया जाता है. 

स्कूल में दाखिला लेना हो या सरकारी योजनाओं का लाभ लेना हो सभी में जन्म प्रमाण पत्र जरूरी होता है. डेथ सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की मौत के बाद उससे जुड़े परिवार के लोग बैंक या मालिकाना हक के लिए करते हैं. अब जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन का नियम बदलने वाला है. जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026 को संसद में पास किया गया है, जो राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाला है. इस नए संशोधन में बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन 1969 के मूल अधिनियम में बदलाव किए गए हैं. अब जन्म और मृत्यु दोनों सर्टिफिकेट बनवाने के लिए नए नियम को फॉलो करना होगा.

क्या किया गया है बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन में बदलाव
वैसे लोग जो बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन कराने में देरी करते हैं, उनके लिए नया नियम मुख्य रूप से बदला है. जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026 में बर्थ और डेथ रजिस्ट्रेशन में देरी करने पर दो नियम बनाए गए हैं. पहला नियम यह है कि यदि आप बर्थ और डेथ की जानकारी एक साल के बाद और दो साल से पहले देते हैं तो दी तो इसका रजिस्ट्रेशन सिर्फ डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट यानी DM, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट यानी SDM या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की ओर से अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही किया जाएगा. 

इतना ही नहीं, इस मामले में वेरिफिकेशन किया जाएगा और आपसे तय फीस भी ली जाएगी. दूसरे नियम के तहत यदि बर्थ और डेथ की जानकारी दो साल के बाद दी जाती है तो इसका रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही होगा. इस तरह से 2 साल की देरी होने के बाद आपको कोर्ट से ही इसका वेरिफिकेशन करवाना होगा. केंद्र सरकार का कहना है कि इस नियम के बदलने का मकसद जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को ज्यादा सटीक, पारदर्शी और समय पर तैयार करना है.

क्यों जरूरी है जन्म प्रमाण पत्र 
किसी भी व्यक्ति की आयु, जन्म स्थान और राष्ट्रीयता का सबसे पहला और मुख्य कानूनी दस्तावेज जन्म प्रमाण पत्र ही होता है. इसके बिना पहचान और भविष्य के कई सरकारी कार्य अधूरे रह जाते हैं. यह व्यक्ति की सही जन्मतिथि और माता-पिता के नाम का आधिकारिक रिकॉर्ड होता है. बच्चों का स्कूल या किसी शिक्षण संस्थान में एडमिशन कराने के दौरान सबसे पहले बर्थ सर्टिफिकेट मांगा जाता है. आपको मालूम हो कि बर्थ सर्टिफिकेट का इस्तेमाल आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और वोटर आईडी कार्ड बनवाने के लिए भी किया जाता है. 

क्यों जरूरी है मृत्यु प्रमाण पत्र
आपको मालूम हो कि मृत्यु प्रमाण पत्र यानी डेथ सर्टिफिकेट किसी व्यक्ति की मृत्यु का आधिकारिक और कानूनी प्रमाण होता है, जो परिवार के कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों को पूरा करने के लिए अत्यंत आवश्यक है.  मृत्यु प्रमाण पत्र मृतक के नाम पर मौजूद जमीन, मकान या अन्य अचल संपत्ति को कानूनी वारिसों के नाम पर ट्रांसफर (म्यूटेशन/दाखिला खारिज) कराने के लिए यह जरूरी है. जीवन बीमा या किसी अन्य पॉलिसी का पैसा पाने के लिए बीमा कंपनियों को मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाना अनिवार्य होता है. मृतक के बैंक खाते को बंद करने, पैसे निकालने या बैंक लॉकर और फिक्स्ड डिपॉजिट का अधिकार प्राप्त करने के लिए डेथ सर्टिफिकेट की मांग की जाती है.

 

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