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नीतीश कुमार के बाद कौन? नीतीश के बेटे निशांत कुमार को JDU में मिल सकती बड़ी जिम्मेदारी

जेडीयू सूत्रों के मुताबिक इस साल मार्च में दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी. कार्यकारिणी की बैठक से निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में भूमिका को लेकर कार्यकर्ताओं को संदेश दिया जा सकता है.

Nitish Kumar With Nishant Kumar
gnttv.com
  • पटना,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:12 PM IST

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उम्र और स्वास्थ्य को लेकर अटकलों के बीच अब जेडीयू में उनके बेटे निशांत कुमार की संभावित भूमिका को लेकर मंथन चल रहा है. पार्टी के बड़े तबके का मानना है कि नीतीश कुमार के बाद निंशांत कुमार जेडीयू के लिए जरूरी भी हैं और मजबूरी भी.

पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका में नजर आ सकते हैं निशांत
यही वजह है कि पार्टी के अंदर से बार बार निशांत कुमार के राजनीति में सक्रिय होने की मांग उठती रही है. ऐसे में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मांग को देखते हुए जल्द ही निशांत पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका में नजर आ सकते हैं.

मार्च में होगी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक
जेडीयू सूत्रों के मुताबिक इस साल मार्च में दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी. कार्यकारिणी की बैठक से निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में भूमिका को लेकर कार्यकर्ताओं को संदेश दिया जा सकता है. पार्टी सूत्रों का मानना है कि जेडीयू निशांत कुमार को उनकी विरासत के अनुसार ही पद चाहती है ताकि कार्यकर्ताओं की भावनाओं के साथ न्याय हो सके. ऐसे में कुछ विकल्प है जिनपर चर्चा चल रही है.

निशांत के पास ये है विकल्प
पहला विकल्प ये है कि निशांत को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया जाए. दूसरा विकल्प पार्टी में महासचिव बनाकर संगठन की बारीकियों से रूबरू कराने और पूरे बिहार में दौरे कराने का है.

जेडीयू नेताओं का मानना है कि निशांत कुमार को लेकर बिहार के युवाओं में क्रेज है जिसका पता पटना और दूसरे जिलों में निशांत के समर्थन में लगे. पोस्टर-बैनर, नारेबाजी और सोशल मीडिया अभियानों से भी चलता है.

पटना में लगाए गए पोस्टर
पटना के गोलम्बरों और चौराहों पर तो नीतीश सेवक, मांगे निशांत जैसे बैनर भी लगाए गए हैं और इनमें निशांत कुमार को जेडीयू का भविष्य और उत्तराधिकारी तक बताया गया.

निशांत कुमार की आगामी सक्रिय भूमिका को लेकर बल तब और मिला जब पिछले साल बिहार चुनाव के नतीजों के बाद निशांत कुमार कुछ सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखे थे. नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में भी निशांत सबसे आगे की पंक्ति में बैठे थे.

डीयू कार्यकर्ता निशांत को पार्टी में चाहते हैं
जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी अपने दो बयानों से जेडीयू कार्यकर्ताओं की ही मांग और भावनाओं को आगे बढाने का काम किया. संजय झा ने कहा था कि जेडीयू कार्यकर्ता निशांत को पार्टी में चाहते हैं पर इस बारे में फैसला निशांत कुमार को ही करना है. लेकिन असल में ये फैसला नीतीश कुमार को करना है कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा.नीतिश कुमार हमेशा से परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं .

नीतीश ने उत्तराधिकारी बनाने की पहल नहीं की
पिछले साल 2025 विधानसभा चुनाव में जब कुछ नेताओं ने निशांत कुमार को नालंदा सीट से चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव रखा तो नीतीश कुमार ने साफ मना कर दिया था. जेडीयू नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार ने निशांत के राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई संकेत पार्टी नेताओं को नहीं दिया है. ऐसे में उनको अगर निशांत को राजनीति में लाना होता या उत्तराधिकारी बनाना होता तो वो जरूर निशांत को उसके लिए ग्रूम करते, तैयार करते पर ऐसा नहीं किया. लेकिन पार्टी नेताओं के मुताबिक पहले की परिस्थिति और आज के हालात में अंतर है.

नीतीश कुमार उत्तराधिकारी स्वीकार करते हैं पार्टी के कार्यकर्ता
अगर जेडीयू जैसे क्षेत्रिय दल को नीतीश कुमार को अपने बाद भी एकजुट रखना है तो परिवार से किसी को आगे लाना ही पड़ेगा नहीं तो नीतीश के बाद जेडीयू में टूट कोई रोक नहीं सकता. पहले नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को भी अपने उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाना शुरू किया था पर आरसीपी नीतीश कुमार की उम्मीदों और भरोसे पर खरे नहीं उतरे. ऐसे में अगर परिवार से उनके बेटे निशांत को ही नीतीश कुमार उत्तराधिकारी बनाते हैं तो पार्टी के कार्यकर्ता उसको स्वीकार करेंगें.

पार्टी नेताओं सा मानना है कि अब और देर करना सही नहीं है और शायद नीतीश कुमार अपने मौजूदा कार्यकाल में ही अपने उत्तराधिकारी के बारे में फैसला कर सकते हैं.

-हिमांशु मिश्रा की रिपोर्ट

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