हरियाणा को यूं ही पहलवानों और खिलाड़ियों की धरती नहीं कहा जाता. यहां की मिट्टी ने देश को ऐसे खिलाड़ी दिए हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है. इसी धरती से अब एक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है. सोनीपत के गांव जठेड़ी के रहने वाले 51 वर्षीय संजय, जिन्हें लोग प्यार से ताऊ संजय उर्फ काला पहलवान कहते हैं, आज अपनी फिटनेस और रफ्तार से युवाओं को भी चुनौती दे रहे हैं. हाल ही में उन्होंने दिल्ली में आयोजित 42 किलोमीटर की मैराथन में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी मेहनत का लोहा मनवाया है.
देसी तरीके से फिटनेस
सफेद दाढ़ी और सफेद बालों के बावजूद ताऊ संजय की ऊर्जा और फिटनेस देखने लायक है. खास बात यह है कि वे किसी आधुनिक जिम या महंगी मशीनों पर नहीं, बल्कि घर में मौजूद देसी और पारंपरिक साधनों से ही अभ्यास करते हैं. वे रोजाना 3 से 4 घंटे तक कसरत करते हैं और अपनी डाइट का भी खास ध्यान रखते हैं. उनकी रफ्तार ऐसी है कि मैदान में अच्छे-अच्छे धावक और बॉडीबिल्डर भी पीछे रह जाते हैं.
बेटे से मिली नई शुरुआत
ताऊ संजय बताते हैं कि बचपन से उनका सपना पहलवान बनने का था, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण वे अपना सपना पूरा नहीं कर सके. समय बीत गया, लेकिन खेल के प्रति उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ. जब वे अपने बेटे को अखाड़े में लेकर जाने लगे, तो उनका पुराना जुनून फिर जाग उठा. इसके बाद उन्होंने अपनी फिटनेस पर ध्यान देना शुरू किया और लगातार मेहनत करते हुए आज इस मुकाम तक पहुंच गए.
अब 100 किलोमीटर रेस जीतने का लक्ष्य
दिल्ली मैराथन में जीत के बाद ताऊ संजय अब 100 किलोमीटर की दौड़ जीतने की तैयारी कर रहे हैं. उनकी कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसमें उनकी फिटनेस और रफ्तार देखकर लोग हैरान हो रहे हैं. ताऊ संजय का युवाओं के लिए एक ही संदेश है, अगर मन में जुनून और मेहनत करने का जज्बा हो, तो किसी भी उम्र में कुछ भी हासिल किया जा सकता है. उनकी कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभर रही है.
रिपोर्टर: पवन राठी
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