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जहां घर-घर बनती है चांदी की मछली, वहीं कीमत गिरते ही कर्ज में डूबा गांव... मचा हड़कंप

मानिया गांव में बनने वाली ये चांदी की मछलियां दो किलो से लेकर दो भर (लगभग 20 ग्राम) तक के अलग-अलग साइज में तैयार की जाती हैं. खास बात यह है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी गांव के हजारों लोग इसी काम से अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं. यहां तैयार मछलियों की मांग सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में भी इनकी अच्छी खपत है.

चांदी को गला, दबा और पीट कर मछली बनाई जाती है
gnttv.com
  • बांका,
  • 08 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:39 PM IST

झारखंड सीमा से सटे बिहार के बांका जिले का कटोरिया प्रखंड स्थित मानिया गांव अपनी एक अनोखी परंपरा और कारीगरी के लिए जाना जाता है. यह गांव किसी बड़े औद्योगिक क्षेत्र जैसा नहीं दिखता, लेकिन यहां लगभग हर घर के भीतर एक छोटी-सी फैक्ट्री चल रही है. इन घरेलू फैक्ट्रियों में चांदी को गलाकर, दबाकर और पीटकर मछली के आकार की कलात्मक आकृतियां बनाई जाती हैं, जिन्हें शादियों में गिफ्ट के तौर पर देने की परंपरा है.

मानिया गांव में बनने वाली ये चांदी की मछलियां दो किलो से लेकर दो भर (लगभग 20 ग्राम) तक के अलग-अलग साइज में तैयार की जाती हैं. खास बात यह है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी गांव के हजारों लोग इसी काम से अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं. यहां तैयार मछलियों की मांग सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में भी इनकी अच्छी खपत है.

गांव वालों को मिलता है करोड़ों का ऑर्डर
फिलहाल शादी-विवाह का लगन शुरू हो चुका है. ऐसे में मानिया गांव के कारीगरों और कारोबारियों ने पहले से ही करोड़ों रुपये के ऑर्डर ले रखे थे. गांव में चहल-पहल बढ़ गई थी और लोगों को अच्छी कमाई की उम्मीद थी. लेकिन इसी बीच चांदी की कीमतों में आए तेज उतार-चढ़ाव ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है.

ग्रामीणों का कहना है कि वे महाजनों से कर्ज लेकर चांदी खरीदते हैं और फिर उससे मछली बनाकर ऑर्डर पूरे करते हैं. जब चांदी का भाव लगातार बढ़ रहा था, तब कई लोगों ने 10 किलो से लेकर 40 किलो तक चांदी एक साथ खरीद ली. उस समय चांदी की कीमत करीब साढ़े चार लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. लेकिन अब अचानक कीमत गिरकर करीब ढाई लाख रुपये प्रति किलो हो जाने से उन्हें भारी नुकसान का डर सता रहा है.

भारी नुकसान का डर छाया
कीमत गिरने से जिन लोगों ने ऊंचे दाम पर चांदी खरीदी थी, उन्हें अब घाटा उठाना पड़ सकता है. कई परिवारों के सामने कर्ज चुकाने की समस्या खड़ी हो गई है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में उनकी पारंपरिक कारीगरी और आजीविका दोनों पर संकट आ सकता है.
मानिया गांव की यह अनोखी चांदी मछली उद्योग न सिर्फ एक कला है, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी का सहारा भी है. ऐसे में चांदी के दामों में स्थिरता और सरकारी सहयोग की मांग अब यहां के लोगों की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है.

रिपोर्टर: प्रिय रंजन

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