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कभी बदनाम था यूपी बोर्ड... जानें कुछ सालों में कैसे बदली छवि

यूपी बोर्ड की परीक्षा आज के समय में CBSE बोर्ड से भी ज्यादा कड़ाई के साथ ली जाती है. इस परीक्षा को लेने के लिए, परीक्षा केंद्र पर अधिकारी पूरी निगरानी बनाए हुए हैं कि किसी भी तरह की चीटिंग परीक्षा केंद्र पर न हो, और छात्रों का एग्जाम पारदर्शी तरीके से हो सके.

यूपी बोर्ड
gnttv.com
  • प्रयागराज,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:37 PM IST

कभी एक समय था जब यूपी बोर्ड की पहचान नकल के ठेके, शिक्षा माफिया और भ्रष्टाचार से जुड़ी रहती थी. लेकिन कुछ ही वर्षों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है. अब बोर्ड की पहचान साफ-सुथरी परीक्षा व्यवस्था और पारदर्शी सिस्टम के लिए होने लगी है. सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कुछ सालों में बोर्ड की छवि पूरी तरह बदल गई? इसका जवाब है, सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति और तकनीक का प्रभावी उपयोग.

तकनीक का व्यापक इस्तेमाल
50 लाख से अधिक छात्रों वाले इस बोर्ड की परीक्षाओं में तकनीक का ऐसा इस्तेमाल हुआ कि प्रदेश के सभी 8033 परीक्षा केंद्रों के प्रत्येक परीक्षा कक्ष, परीक्षार्थी, परीक्षक, स्ट्रांग रूम और पूरे कैंपस पर सीसीटीवी की नजर रखी जा रही है.

ये सीसीटीवी सिर्फ वीडियो ही नहीं, बल्कि ऑडियो भी रिकॉर्ड करते हैं. यानी बोलकर भी कोई गड़बड़ी करना आसान नहीं है. सीसीटीवी की निगरानी पर नजर रखने के लिए सरकार की ओर से त्रिस्तरीय व्यवस्था की गई है और 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है.

स्टेट और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम
लखनऊ और प्रयागराज स्थित बोर्ड मुख्यालय में स्टेट लेवल का कंट्रोल और कमांड सेंटर स्थापित किया गया है, जहां से प्रदेश के सभी 75 जिलों के परीक्षा केंद्रों पर नजर रखी जाती है. इसके अलावा 75 जिलों में जिला स्तरीय कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं.

अधिकारियों की टीम प्रयागराज जिले के कंट्रोल रूम पहुंची, जहां से जिले के 333 परीक्षा केंद्रों और 1,95,963 परीक्षार्थियों पर नजर रखी जा रही है. जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में बने इस कंट्रोल रूम में मौजूद डीआईओएस प्रयागराज पी. एन. सिंह ने बताया कि यहां से परीक्षा की निगरानी के साथ-साथ दो हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं. शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है. इस कंट्रोल रूम में 3 बड़े स्क्रीन और 20 कंप्यूटर लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से लगातार परीक्षा पर नजर रखी जाती है.

मॉनिटरिंग के दो तरीके
सीसीटीवी मॉनिटरिंग के दो तरीके हैं. पहला, रेंडम तरीके से अलग-अलग केंद्रों, उनके कैंपस, स्टाफ, स्ट्रांग रूम और परीक्षा कक्षों की निगरानी. दूसरा, किसी शिकायत पर संबंधित विद्यालय के क्रमांक और कोड नंबर के माध्यम से तुरंत उसे स्क्रीन पर लाकर बारीकी से देखना. अगर किसी प्रकार की आशंका होती है तो तुरंत सचल दस्ते को भेजा जाता है और पुलिस व मजिस्ट्रेट को अलर्ट किया जाता है. कुछ ही मिनटों में कार्रवाई होती है.

सुरक्षा की अतिरिक्त व्यवस्था
डीआईओएस पी. एन. सिंह के अनुसार, जिले में 8 सचल दस्ते लगातार सक्रिय रहते हैं. पूरे जिले को 3 सुपर जोन, 8 जोन और 33 सेक्टर में बांटा गया है. परीक्षा संचालन के लिए सुपर जोनल मजिस्ट्रेट, जोनल मजिस्ट्रेट और सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं. जिले के 11 संवेदनशील और 8 अति संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. परीक्षा से जुड़ा पूरा डेटा 6 महीने तक सुरक्षित रखा जाता है.

त्रिस्तरीय निगरानी से नकल पर रोक
बोर्ड मुख्यालय, जिला स्तरीय कंट्रोल रूम और प्रत्येक विद्यालय में लगे सीसीटीवी इन तीन स्तरों की निगरानी के बाद परीक्षा में गड़बड़ी की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है.

(रिपोर्ट- आनंद राज)

 

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