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चाय से लेकर करोड़ों के कारोबार तक, UPI बना देश की पहली पसंद, अगस्त में टूट गया ट्रांजैक्शन का पुराना रिकॉर्ड

अगस्त 2026 में UPI ने लेनदेन की संख्या के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है. NPCI के मुताबिक, इस महीने 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए और कुल 29.82 लाख करोड़ रुपये का डिजिटल पेमेंट किया गया.

UPI Transection
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:47 PM IST

भारत में ऑनलाइन पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. खासकर UPI लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है. अब NPCI के नए आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में UPI के जरिए लेनदेन की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. इस महीने 24.51 अरब यानी करीब 2451 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए. वहीं, इनकी कुल रकम 29.82 लाख करोड़ रुपये रही. तो चलिए आपको बताते हैं कि क्या कहती है रिपोर्ट्स

अगस्त में UPI ट्रांजैक्शन ने बनाया नया रिकॉर्ड
NPCI के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में UPI ट्रांजैक्शन की संख्या 24.51 अरब रही, जो जुलाई के 23.66 अरब ट्रांजैक्शन से ज्यादा है. जून में UPI के जरिए 22.72 अरब और मई में 23.2 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे. यानी पिछले कुछ महीनों में UPI के इस्तेमाल में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है. अगर ट्रांजैक्शन की वैल्यू की बात करें तो अगस्त में यह 29.82 लाख करोड़ रुपये रही. अगस्त 2025 में UPI ट्रांजैक्शन की वैल्यू 24.85 लाख करोड़ रुपये थी. इस तरह सालाना आधार पर इसमें करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

रक्षाबंधन पर भी खूब हुआ UPI का इस्तेमाल
अगस्त में रक्षाबंधन का त्योहार भी था. इस दौरान लोगों ने रिश्तेदारों और दोस्तों को पैसे भेजने, गिफ्ट खरीदने और दूसरे छोटे-बड़े भुगतान के लिए UPI का काफी इस्तेमाल किया. जानकारों का कहना है कि त्योहारों के दौरान UPI के जरिए होने वाले लेनदेन में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

11 देशों में इस्तेमाल हो रहा UPI
बता दें कि, UPI अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. इसे विदेशों में भी इस्तेमाल किया जा रहा है. फिलहाल 11 देशों में UPI स्वीकार किया जाता है. इनमें सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया, ग्रीस और उज्बेकिस्तान शामिल हैं.

UPI की शुरुआत 25 अगस्त 2016 को हुई थी. पिछले 10 साल में इसने भारत में डिजिटल पेमेंट का तरीका काफी बदल दिया है. FY17 में UPI से करीब 0.07 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे, जो FY26 में बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गए. 

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