जुलाई का महीना आमतौर पर झमाझम बारिश का माना जाता है. लेकिन इस बार कई राज्यों में लगातार बारिश के बाद अचानक मौसम बदल गया है. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश कम हो गई है. धूप निकल रही है और उमस भी बढ़ने लगी है. इसकी वजह है 'मानसून ब्रेक'.
मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 6-7 दिनों तक देश के बड़े हिस्से में बारिश की गतिविधियां कमजोर रह सकती हैं. हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मानसून खत्म हो गया है. साल 2015 और 2021 के बाद 11 साल में यह तीसरा मौका है जब देश के बड़े हिस्से में जुलाई में मानसून ब्रेक जैसी स्थिति बनी है.
क्या होता है मानसून ब्रेक?
मानसून ब्रेक का मतलब है कि कुछ दिनों के लिए मानसूनी बारिश का कमजोर पड़ जाना. हर साल मानसून के दौरान एक समय ऐसा आता है जब बारिश अचानक कम हो जाती है. यह मौसम का सामान्य हिस्सा है. इसे ही ब्रेक इन मानसून कहा जाता है. इस दौरान बादल पूरी तरह गायब नहीं होते, बल्कि उनका रुख बदल जाता है. नतीजा यह होता है कि देश के कुछ हिस्सों में बारिश कम हो जाती है, जबकि दूसरे इलाकों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश होने लगती है. यानी मानसून जाता नहीं है, सिर्फ कुछ दिनों के लिए उसकी सक्रियता कम हो जाती है.
मानसून ब्रेक क्यों होता है?
भारत में बारिश का बड़ा कारण मानसून ट्रफ होती है. यह कम दबाव वाली एक लंबी पट्टी होती है, जो पूरे मानसून को नियंत्रित करती है. जब यह ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति में रहती है, तब देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होती है. लेकिन जब यह ट्रफ उत्तर की ओर खिसककर हिमालय की तलहटी के पास पहुंच जाती है, तब उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में बारिश कम हो जाती है. इसी स्थिति को मानसून ब्रेक कहा जाता है. इसके साथ ही पश्चिम से आने वाली सूखी हवाएं भी देश के अंदर तक पहुंचने लगती हैं, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है.
इस बार इतनी जल्दी क्यों आया मानसून ब्रेक?
इस साल मानसून ने 9 जुलाई को पूरे देश को कवर किया. इसके कुछ ही दिनों बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई. बंगाल की खाड़ी में बना पहला मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम अब कमजोर पड़ चुका है. इसी सिस्टम की वजह से पिछले दिनों ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों में अच्छी बारिश हुई थी. अब यह सिस्टम खत्म हो चुका है और फिलहाल बंगाल की खाड़ी में कोई नया मजबूत सिस्टम नहीं बन रहा है. इसलिए बारिश की गतिविधियां कमजोर हो गई हैं.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई के दूसरे सप्ताह में इतनी जल्दी मानसून ब्रेक जैसी स्थिति बनना सामान्य से थोड़ा अलग जरूर है, लेकिन यह मौसम की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है.
किन राज्यों में बारिश कम होगी?
दिल्ली-एनसीआर
पंजाब
हरियाणा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश
राजस्थान
मध्य प्रदेश
महाराष्ट्र के कई हिस्से
गुजरात
दक्षिण भारत के कई राज्य
वहीं दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत, बिहार, पश्चिम बंगाल और हिमालय की तलहटी वाले इलाके में अच्छी बारिश जारी रह सकती है.
क्या गर्मी और उमस बढ़ेगी?
बारिश कम होने का सीधा असर तापमान पर पड़ेगा. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान बढ़ सकता है. इसके साथ हवा में नमी बनी रहेगी, इसलिए उमस (Humidity) भी ज्यादा महसूस होगी. यानी बहुत ज्यादा गर्मी भले न पड़े, लेकिन पसीना और चिपचिपाहट लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है.
क्या एल नीनो का भी असर है?
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस साल एल नीनो भी मानसून को प्रभावित कर सकता है. एल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारत के मानसून पर असर पड़ता है. कई बार इसकी वजह से बारिश कम होती है और मानसून ब्रेक की अवधि भी लंबी हो सकती है. हालांकि, हर मानसून ब्रेक का कारण सिर्फ एल नीनो नहीं होता. मानसून ट्रफ की स्थिति और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले लो-प्रेशर सिस्टम भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं.
ये भी पढ़ें