सामूहिक विवाह कार्यक्रम की तस्वीर
सामूहिक विवाह कार्यक्रम की तस्वीर
यूपी के कौशांबी जिले में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के दौरान एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि पहले से शादी तय होने के बावजूद एक युवती का सामूहिक विवाह योजना में पंजीकरण करा दिया गया. जब तय दूल्हा सामूहिक विवाह में नहीं पहुंचा, तो गांव के ही एक युवक को आधा दहेज देने का लालच दिया और मंडप में बैठा दिया गया.
जब इसकी जानकरी हुई तो हंगामा हो गया. युवक के भाई की तहरीर पर पुलिस ने FIR दर्ज कर किया है. खुलसा जब हुआ जब युवक की फिंगर मैच नही हुआ. वहीं सीडीओ ने विवाह पंजीकरण निरस्त करते हुए पूरे मामले की जांच के जांच के आदेश दिए है
मामला सिराथू तहसील का है. सैनी कोतवाली के रविवार को सयारा स्थित गेस्ट हाउस में शासनादेश के अनुसार सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किया गया था. जिसमें 230 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया. सैनी कोतवाली क्षेत्र कि एक गांव युवती का विवाह रायबरेली जिले के एक युवक से तय हुआ है, जिसकी शादी 17 मार्च 2027 को होनी है.
इससे पहले युवती के परिवार वालों ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आवेदन किया था. इसी दौरान युवती का होने वाला पति किसी कारण शादी में नहीं पहुंचा. आरोप है कि इसके बाद युवती के परिजनों ने गांव के ही एक युवक को आधा दहेज की रकम देने का लालच देकर मंडप में बैठा दिया.
विवाह के दौरान वर और वधू के फिंगर प्रिंट का मिलान कराया जा रहा था. युवती का फिंगर प्रिंट तो मैच हो गया, लेकिन युवक का फिंगर प्रिंट नहीं मिला. इसके बाद अधिकारियों को शक हुआ और जांच में मामला सामने आ गया. युवक को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया, जबकि विवाह का रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया.
शिवम वाल्मीकि ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि उसके भाई सनी वाल्मीकि उम्र करीब 16 वर्ष उसे सामूहिक विवाह में आधा दहेज देने के लालच में उसे मंडप में बैठा दिया गया और उसकी फोटो खिंचवाई गई. उसका आरोप है कि पूरा कुरैशां बनो, नगमा बनो, और अमरजीत मौर्य ने जो मुंशी का काम करता है यह तीन लोग मिलकर जो सामूहिक विवाह में पैसा मिलने वाला था उसे हड़पना चाहते थे. पुलिस ने तीन लोगों पर केस दर्ज किया है और मामले की जांच में जुड़ गई है.