महिला आरक्षण बिल लोकसभा में गिरा.. नहीं मिल पाई दो-तिहाई बहुमत, 52 वोट की पड़ी कमी

आज लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा हुई, जिसके बाद वोटिंग में बिल को बहुमत नहीं मिल पाई और बिल पारिस नहीं हुआ.

Women Reservation Bill
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 17 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:27 PM IST

131वां संविधान संशोधन विधेयक, जिसे महिला आरक्षण बिल के रूप में पेश किया गया. वह 2026 में लोकसभा में पारित नहीं हो सका. इस बिल पर सदन में लंबी चर्चा के बाद वोटिंग कराई गई. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग के दौरान मौजूद 489 सांसदों में से 278 ने इसके पक्ष में और 211 ने विरोध में वोट किया.

जरूरी बहुमत का आंकड़ा पूरा न होने के चलते यह विधेयक लोकसभा में ही गिर गया. बाद में जारी अंतिम आंकड़ों के अनुसार, बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट दर्ज किए गए. इसी के साथ सरकार द्वारा लाए गए दो अन्य विधेयकों को भी वापस ले लिया गया और लोकसभा की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

'विपक्ष ने किया सरकार के हर बड़े फैसले का विरोध'
गृह मंत्री अमित शाह ने इस दौरान कहा कि महिलाओं को आरक्षण दिलाने के लिए सरकार हर संभव संघर्ष करने को तैयार है और उन्हें उनका अधिकार दिलाकर ही रहेगी. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष ने सरकार के लगभग हर बड़े फैसले और कानून का विरोध किया है. उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने, राम मंदिर निर्माण, तीन तलाक खत्म करने और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन सभी मुद्दों पर भी विपक्ष ने विरोध किया था.

विपक्ष ने नहीं दिया साथ महिला आरक्षण का - शाह
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बोलते हुए अमित शाह ने विपक्ष के रवैये को महिला आरक्षण के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि यह विरोध किसी प्रक्रिया या तकनीकी पहलू का नहीं, बल्कि महिलाओं को आरक्षण देने के विचार का विरोध है. साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2029 तक महिला सशक्तिकरण का वादा पूरा किया जाएगा और 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ ही होगा.

कितने वोट की थी जरूरत
वर्तमान स्थिति में इस संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराना सत्तारूढ़ एनडीए के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. लोकसभा में एनडीए के पास 293 सांसद हैं, जो कुल संख्या का लगभग 54 प्रतिशत है, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं. इसके अलावा निर्दलीय और छोटे दलों के सदस्य भी इस गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 

नियमों के अनुसार, किसी भी संवैधानिक संशोधन बिल को पारित कराने के लिए उपस्थित और वोट करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है. इस बिल को पास होने के लिए 352 वोट कि जरूरत थी, लेकिन केवल 298 मिले और 52 वोट की कमी के चलते बिल पारित नहीं हो सका.

 

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