राजस्थान के धौलपुर जिले में 10 और 11 जनवरी को एशियन वाटर बर्ड काउंट 2026 का आयोजन किया गया. ये गणना वेटलैंड इंटरनेशनल साउथ एशिया, राजस्थान वन विभाग और बर्ड काउंट इंडिया के सहयोग से संपन्न हुई.
राजस्थान का धौलपुर जिले का चंबल एरिया पहले से ही इंडियन स्किमर और ब्लैक-बेलिड टर्न जैसे दुर्लभ पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है. दमोह क्षेत्र में गिद्धों की पांच प्रजातियां पाई गई. जिनमें प्रवासी हिमालयन ग्रिफन और यूरेशियन ग्रिफ़न गिद्ध भी शामिल हैं.
इस क्षेत्र में व्हीटियर और ग्रेट ग्रे श्राइक जैसे छोटे प्रवासी भी डेरा डाले हुए हैं. तगावली एसटीपी क्षेत्र, नींभी, रामसागर और पार्वती डैम में प्रवासी बतखों की कई प्रजातियां पाई गई. जिनमें पाएड एवोसट ग्रे लेगगूस्ज गूज, रफ्फ, ब्लैक टेल्ड गोडविट, कॉटन पिग्मी गूज, रेड-क्रेस्टेड और कॉमन पोचार्ड, फेरुजिनस डक शामिल हैं.
मछली खाने वाले बड़े आकार के प्रवासी पक्षी पेलिकन की दो प्रजातियां भी यहां पाई गईं. जल पक्षियों में बार-हेडेड गूज़ भी हजारों की संख्या में पाए गए. ये पक्षी शीत ऋतु के दौरान मंगोलिया से हिमालय के ऊपर से उड़ान भरते हुए भारत आते हैं.
केसरबाग अभयारण्य और वन विहार जैसे झाड़ीदार क्षेत्रों और घने वनों में छोटे पासेराइन पक्षियों स्थानीय और प्रवासी दोनों की अधिक संख्या दर्ज की गई. कॉमन रोज़ फिंच,ग्रे बुशचैट और रेड-व्हिस्कर्ड बुलबुल को धौलपुर क्षेत्र में पहली बार देखा गया हैं.
धौलपुर जिले के जलाशयों के आस-पास इस बार हजारो की संख्या में इंडियन स्कीमर, लिटिल ग्रीव, ग्रेट व्हाइट पैलिकन, ग्रेट कॉर्मोनेंट, लिटिल कार्मोनेंट, इंडियन पोंड हेरोन, कैटल ईग्रेट, लिटिल ईग्रेट, ग्रेहेरोन, पेंटेड स्टॉर्क, एशियन स्पूनबिल, व्हाइट स्पूनबिल, लेसर विसलिंग डक, बार हेडेड गीज, रडी शेल्डक, कांब डक, गेडबॉल, कॉमन टील, स्पॉट बिल्ड डक इत्यादि प्रजातियों के पक्षी डेरा डाले हुए है.
चंबल नदी पर भारी संख्या में इंडियन स्कीमर मिले है. देशी भाषा में पनचीरा के नाम से जाना जाता है. इंडियन स्कीमर की चोंच उसके शरीर का सबसे आकर्षक भाग होती है. इसकी चोंच लम्बी, मोटी, गहरी नारंगी और सिरे से हल्के पीले रंग की होती है.
चंबल को आमतौर पर ब्लैक बेल्लिद टर्न और स्किमर जैसे पक्षियों के लिए ही जाना जाता है. वहीं यह क्षेत्र बोनेलीज ईगल, वेस्टर्न मार्श हैरियर और शॉर्ट-टोड स्नेक ईगल जैसे शिकारी पक्षी भी भारी संख्या में मिले हैं.
बोनेलीज ईगल चंबल के आस-पास की बीहड़ में घोंसला बनाता है. जबकि अन्य प्रजातियां प्रवासी हैं. इनकी उपस्थिति इस बात की महत्वपूर्ण झलक देती है कि चंबल के परिदृश्य का संरक्षण कितना आवश्यक है. क्योंकि पहली बार विशेषज्ञों द्वारा इतना व्यापक सर्वेक्षण किया गया. इसलिए कई प्रजातियां पहली बार ई-बर्ड पर दर्ज की गई.
धौलपुर के विविध भौगोलिक परिदृश्य पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया. जिसमें केवल आर्द्रभूमि ही नहीं बल्कि झाड़ीदार क्षेत्र शुष्क भूमि घने वन,बीहड़ और घाटियां भी शामिल हैं. ये सभी क्षेत्र मिलकर इसे पक्षियों के लिए एक स्वर्ग बनाते हैं.