दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है. घरों को रोशन करने के लिए कहीं रंग-बिरंगे दीये सज रहे हैं तो कहीं आकर्षक सजावटी सामान लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. इसी बीच झांसी में स्वदेशी उत्पादों, खादी और मिट्टी से बने पारंपरिक सामान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से मंडल स्तरीय खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी-2026 का आयोजन किया गया है.
झांसी के गंगाधर राव कला मंच परिसर में 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पादों की दुकानें सजी हुई हैं. यहां मिट्टी के दीपक, भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्तियां, रंगीन फाउंटेन, घरों की सजावट के सामान, खादी के सूट, सदरी और जैकेट सहित कई तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं. प्रदर्शनी में खरीदारी के लिए पहुंच रहे लोगों में भी खासा उत्साह दिखाई दे रहा है.
इस आयोजन की खास बात यह है कि यहां सिर्फ सामान की बिक्री ही नहीं हो रही, बल्कि स्थानीय और छोटे कारीगरों को अपनी कला, हुनर और उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का अवसर भी मिल रहा है. बरुआ सागर से आए मिट्टी के सामान के दुकानदार ने बताया कि खादी ग्रामोद्योग की ओर से दीपावली के अवसर पर यह मेला लगाया गया है, जो 5 नवंबर तक चलेगा. वह खुद मिट्टी के उत्पाद तैयार करते हैं और उन्हें बेचने का काम भी करते हैं. उनके स्टॉल पर मिट्टी के दीपक, फाउंटेन और घरों को सजाने के लिए कई तरह के आकर्षक सामान मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि ग्राहकों का अच्छा सहयोग मिल रहा है, लेकिन छोटे व्यापारियों को और अधिक ग्राहक मिलने चाहिए, ताकि उनका व्यापार बेहतर हो सके.
वहीं चरगांवा से आए मिट्टी के कारीगर महेश प्रजापति ने बताया कि उनके पास मौजूद सभी उत्पाद मिट्टी से तैयार किए गए हैं. दीपावली के लिए वह गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, रंगीन फाउंटेन और सजावट के कई नए उत्पाद लेकर आए हैं. उन्होंने कहा कि मिट्टी के उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ हमारी पुरानी परंपरा और संस्कृति से जुड़े हुए हैं. महेश प्रजापति के मुताबिक छोटे कारीगरों के पास दूसरे शहरों में जाकर अपने उत्पाद बेचने के पर्याप्त संसाधन नहीं होते. ऐसे में इस तरह की प्रदर्शनी उन्हें एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराती है. उन्होंने सरकार की ओर से आधुनिक मशीनें, भट्टियां और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों के साथ माटी कला बोर्ड के गठन को भी कारीगरों के लिए लाभकारी बताया.
प्रदर्शनी में खरीदारी करने पहुंचीं पारुल तिवारी ने बताया कि वह इलाइट चौराहे से यहां आई हैं. उन्हें मेले में हस्तनिर्मित और सजावटी सामान की काफी अच्छी वैरायटी देखने को मिली. उन्होंने घर की सजावट के लिए एक सामान भी खरीदा है, जिसका इस्तेमाल वह दीपावली पर करेंगी. उनका कहना है कि झांसी में इस तरह के आयोजन लगातार होने चाहिए, क्योंकि इससे ग्राहकों को अच्छी और अलग-अलग चीजें खरीदने का मौका मिलता है, वहीं छोटे दुकानदारों और कारीगरों को भी आर्थिक लाभ मिलता है.
इसी तरह ग्राहक आदित्य द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने प्रदर्शनी से खादी के सूट, सर्दियों के लिए सदरी और जैकेट के साथ दीपावली पूजन के लिए मिट्टी के दीये तथा भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्तियां खरीदी हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन हाथों से उत्पाद तैयार करने वाले कारीगरों और स्वदेशी सामान को प्रोत्साहित करने का अच्छा माध्यम हैं. आज नई पीढ़ी भी पारंपरिक और हस्तनिर्मित उत्पादों को पसंद कर रही है. ऐसे आयोजनों से छोटे व्यापारियों को आर्थिक मजबूती मिलने के साथ खादी, माटी कला और भारतीय संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है.