Advertisement

Story of Bravery: 10 साल की बच्ची ने पेश की बहादुरी की मिसाल, तेंदुए से लड़कर बचाई दादी की जान

देवगढ़ बारिया के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट आर के परमार ने बताया कि वह बच्ची अभी 5वीं कक्षा में पढ़ती है. हीरल ने जब देखा की तेंदुआ उनकी दादी को अपने चंगुल में ले चुका है और मारने वाला है तो हीरल ने अपनी जान की परवाह किए बगैर उन्हें बचाने का प्रयास किया.

10 साल बच्ची ने पेश की बहादुरी की मिसाल
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2023,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST
  • तेंदुआ ने जबड़ों में दबा लिया था दादी सिर 
  • तेंदुए ने आगे जाकर किया शिकार 

एक 10 साल की बहादुर बच्ची अपनी दादी को बचाने लिए तेंदुए से लड़ गई. जी हां, ये घटना मंगलवार को हेमलेट के रिमोट एरिया दाहोड़ की है. हीरल चौहान नाम की लड़की ने जब देखा की एक तेंदुआ उनकी दादी को अपने चंगुल में ले चुका है और दादी को मारने वाला है तो हीरल ने अपनी जान की परवाह किए बगैर उससे दो-दो हाथ कर दिए.   

तेंदुआ ने जबड़ों में दबा लिया था दादी सिर 

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, देवगढ़ बारिया के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट आर के परमार ने बताया कि वह बच्ची अभी 5वीं कक्षा में पढ़ती है. उन्होंने घटना के बारे में विस्तार से कहा, “लड़की कक्षा 5 में पढ़ती है. वह लिमखेड़ा तालुका के पाड़ा गांव में अपने घर के बाहर अपनी 59 वर्षीय दादी चंपा चौहान के बगल में सो रही थी. एक तेंदुआ चुपके से दादी के पास पहुंचा और उनका सिर अपने जबड़ों में दबा लिया. दादी जब दर्द से चीख पड़ी तो उनकी पोती एकदम जाग गई. तेंदुआ जब दादी को घसीटकर ले जाने लगा, तो हीरल मदद के लिए चिल्लाते हुए उससे लिपट गई.” 

आगे वन संरक्षक आर के परमार कहते हैं, “लड़की और तेंदुए के बीच हुई लड़ाई में जब पडोसी भी मदद के लिए आने लगे तो तेंदुए ने अपने आप ही हीरल को जाने दिया. हीरल के सिर पर गंभीर चोट लगने से बच गई.”

तेंदुए ने आगे जाकर किया शिकार 

हालांकि, भूखा तेंदुआ और अधिक शिकार करने के मूड में था. करीब आधा किलोमीटर दूर जाकर उसने उसी गांव के एक 43 वर्षीय व्यक्ति पर उसने हमला कर दिया, वह भी अपने घर के बाहर सो रहा था. रमेश चौहान की चीख पुकार सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे, जिसके बाद तेंदुआ भाग निकला. लेकिन गर्दन पर गंभीर चोट लगने से व्यक्ति की ट्रीटमेंट के दौरान मौत हो गई.

इसे लेकर वन संरक्षक कहते हैं, “गर्मियों में, जंगल में पानी के स्रोत सूख जाते हैं, इसलिए यह संभव है कि तेंदुआ जंगल से बाहर आ गया हो क्योंकि वह प्यासा था. तभी उसने अंधेरे में शिकार करने का फैसला किया.” 

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, हत्यारे तेंदुए को पकड़ने के लिए वन अधिकारियों ने पाड़ा गांव और उसके आसपास पिंजरा लगा रखा है. लिमखेड़ा में पिछले चार दिनों में इस तरह की यह दूसरी घटना है. 21 मई की सुबह फूलपुर गांव में घर में सो रही दो लड़कियों पर तेंदुए ने हमला कर दिया था. लड़कियों के पिता ने तेंदुए को पकड़ लिया और अपनी बेटियों को बचा लिया.  

   
 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement