सहारनपुर में कांवड़ यात्रा के बीच एक अनोखी कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. पंजाब के पटियाला से एक परिवार अपनी 100 साल से अधिक उम्र की दादी सुनहरी देवी को पालकी में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेने के बाद अब करीब 295 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पटियाला लौट रहा है. दादी को उनके पोते, पड़पोते, पोतियां और परिवार के अन्य सदस्य बारी-बारी से कंधों पर उठाकर ले जा रहे हैं. यह कांवड़ सिर्फ धार्मिक आस्था की मिसाल नहीं, बल्कि परिवार और बुजुर्गों के प्रति सम्मान का संदेश भी दे रही है.
दादी की इस अनोखी कांवड़ में 7 पोते, 6 पड़पोते, 5 पोतियां, 3 पड़पोतियां, 2 बेटियां और एक नाती शामिल हैं. परिवार का कहना है कि भगवान ने उन्हें जीवन में सब कुछ दिया है, इसलिए इस बार उन्होंने अपनी कांवड़ दादी के नाम करने का फैसला किया. बीमारी और उम्र अधिक होने के बावजूद परिवार दादी को हरिद्वार स्नान कराने लाया और अब उन्हें पालकी में बैठाकर पैदल अपने घर की ओर ले जा रहा है. कांवड़ यात्रा के दौरान रास्ते में लोग इस परिवार की तस्वीरें और वीडियो बनाते नजर आ रहे हैं.
कावड़िया जोगिंदर कुमार ने बताया कि उनकी दादी की उम्र 100 साल से ज्यादा है और उन्हें अपने कंधों पर लेकर चलने में परिवार को बेहद खुशी हो रही है. उन्होंने कहा कि मां-बाप और बुजुर्गों से बड़ा कोई भगवान नहीं होता, इसलिए उनकी सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है. वहीं सुनहरी देवी भी अपने पोते-पोतियों को आशीर्वाद देते हुए लोगों से आपस में प्रेम से रहने की अपील कर रही हैं. दादी की यह कांवड़ आज के दौर में बुजुर्गों के सम्मान, परिवार के रिश्तों और आपसी प्रेम की ऐसी तस्वीर पेश कर रही है, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो रहा है.