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सावन का पहले सोमवार पर 125 फीट ऊंचे शिव मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़, भोलेनाथ की तीसरी आंख में जड़ा है हीरा

हाथों में गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा लिए भक्त भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं. मंदिर परिसर पूरे दिन 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से गूंजता रहा.

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Shiva Temple Shiva Temple
हाइलाइट्स
  • सिर्फ 8 फीट चौड़ा, लेकिन 125 फीट ऊंचा मंदिर

  • 40 दिन लगातार दर्शन करने से पूरी होती है मनोकामना

आज सावन का पहला सोमवार है. भगवान शिव को समर्पित इस पवित्र महीने में देशभर के शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. हरियाणा के करनाल स्थित श्री सनातन धर्म प्राचीन शिव मंदिर में भी भक्त ब्रह्ममुहूर्त से जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं. उत्तर भारत के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में शामिल यह करीब 125 फीट ऊंचा नौ मंजिला मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला, अष्टधातु की शिव प्रतिमा और भगवान शिव की तीसरी आंख में जड़े हीरे के कारण विशेष पहचान रखता है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान भोलेनाथ जरूर सुनते हैं.

सुबह 5 बजे से शुरू हो गया जलाभिषेक
करनाल के सराफा बाजार स्थित श्री सनातन धर्म प्राचीन शिव मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर सुबह 5 बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया. हाथों में गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा लिए भक्त भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना कर रहे हैं. मंदिर परिसर पूरे दिन 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से गूंजता रहा.

सिर्फ 8 फीट चौड़ा, लेकिन 125 फीट ऊंचा मंदिर
साल 1975-76 में बने इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी ऊंचाई है. महज 8 फीट चौड़ाई में बना यह मंदिर करीब 125 फीट ऊंचा है और उत्तर भारत के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में गिना जाता है. नौ मंजिला इस मंदिर की प्रत्येक मंजिल पर विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं. ऊपरी मंजिल से पूरे करनाल शहर का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है.

भगवान शिव की तीसरी आंख में जड़ा है हीरा
मंदिर में स्थापित भगवान शिव की प्रतिमा अष्टधातु से बनी हुई है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है. भगवान भोलेनाथ त्रिशूल और डमरू के साथ विराजमान हैं. इस प्रतिमा की सबसे अनोखी विशेषता उनकी तीसरी आंख में जड़ा हीरा है. बताया जाता है कि यह हीरा करनाल के पूर्व सांसद अरविंद शर्मा ने भेंट किया था. यही वजह है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

40 दिन लगातार दर्शन करने से पूरी होती है मनोकामना
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यदि कोई श्रद्धालु लगातार 40 दिनों तक यहां आकर भगवान शिव के दर्शन करता है और सच्चे मन से अपनी इच्छा व्यक्त करता है, तो भोलेनाथ उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं. इसी आस्था के कारण सावन, महाशिवरात्रि और अन्य पर्वों पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

सावन में बढ़ जाता है मंदिर का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. इस दौरान सोमवार का व्रत रखने और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र एवं धतूरा अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. इसलिए सावन के पहले सोमवार पर करनाल का यह ऐतिहासिक शिव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा भोलेनाथ की कृपा से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

-कमलदीप की रिपोर्ट