Bhopal: अजीब शौक वाला चोर! ब्रा-पेंटी करता था चोरी, पहनकर सोने का था शौक

मध्य प्रदेश के भोपाल में एक अजीबोगरीब चोर पकड़ा गया है. ये चोर सिर्फ महिलाओं के अंडरगारमेंट्स चोरी करता था. जब पुलिस ने इस चोर को गिरफ्तार किया तो ये महिलाओं के अंडरगारमेंट्स पहना हुआ था.

Bhopal News
gnttv.com
  • भोपाल,
  • 01 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:25 PM IST

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कोलार में एक अजीबोगरीब चोर को पुलिस ने पकड़ा. इस चोर का अजीब शौक था. ये चोर सिर्फ महिलाओं के अंडरगारमेंट्स चोरी करता था और उसे पहनकर घूमता था. लेकिन जब एक घर में चोरी के लिए घुसा तो घरवालों ने देख लिया. इसके बाद वो भाग निकाला. हालांकि पुलिस ने बाद में उसे पकड़ लिया.

महिलाओं के अंडरगारमेंट्स करता था चोरी-
आरोपी कोलार क्षेत्र में महिलाओं के अंडरगारमेंट्स चोरी करता था और फिर खुद पहनकर घूमता था, मंगलवार रात को आरोपी अमरनाथ कॉलोनी में एक घर में घुसा और बॉलकनी से महिलाओं के अंडरगारमेंट्स चुरा लिए, अंडरगारमेंट्स चुराने के बाद जब घर के बाहर निकल रहा था तो घर वालों को उसकी परछाई दिखी, तभी घर के लोगों ने चिल्लाया शुरू किया. इसके बाद आरोपी घर के गारमेंट्स लेकर भाग गया.

कार्ड से पकड़ा गया चोर-
लेकिन गारमेंट्स चोरी करने वाले आरोपी के जेब में उसका श्रमिक कार्ड था, जो भागते समय घर में ही गिर गया था. जिसपर दीपेश नाम लिखा हुआ था. जिस घर में अंडरगारमेंट्स चोरी हुए थे, परिजनों ने फिर कोलार थाने में उसकी शिकायत की, पुलिस ने श्रमिक कार्ड के आधार पर बुधवार शाम को आरोपी को उसके घर से पकड़ लिया. 

गिरफ्तारी के वक्त पहना था अंडरगारमेट्स-
पुलिस जब आरोपी को पकड़ने गई तो वह घर में सो रहा था और चोरी किए हुए अंडरगारमेंट्स उसने पहन रखा था. जब पुलिस उसे पकड़ने गई तो आसपास भीड़ जमा हो गई. लोगों ने वीडियो भी बनाया. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी महिलाओं के अंडरगारमेंट्स पहना हुआ है. कोलार क्षेत्र में आरोपी ने इससे पहले भी एक घर से अंडरगारमेंट्स चोरी किए थे. 

कार्रवाई की जा रही है- थाना प्रभारी
कोलार थाना प्रभारी संजय सोनी ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है. आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है. डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसे मामलों में मनोचिकित्सीय मूल्यांकन और काउंसलिंग भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. समाज को भी इस तरह के मामलों में केवल मजाक के शर्मिंदगी के रूप में देखने के बजाय मानसिक व्यावहारिक समस्या के रूप में समझने की आवश्यकता है.

(धर्मेंद्र साहू की रिपोर्ट)

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