बिहार की राजधानी पटना में अंत्येष्टि सेवाओं को आधुनिक, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है. दीघा घाट पर बिहार का पहला एलपीजी (LPG) आधारित शवदाह गृह बनाया जाएगा.
यह परियोजना पटना नगर निगम और ईशा फाउंडेशन की सहयोगी संस्था ईशा आउटरीच के संयुक्त प्रयास से साकार होगी. शनिवार को नगर निगम मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में महापौर सीता साहू और नगर आयुक्त यशपाल मीणा की मौजूदगी में इस परियोजना को लेकर औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. नगर निगम की ओर से नगर अभियंता बिंदू रजक और ईशा आउटरीच की ओर से प्रमुख युवराजन ए ने एग्रीमेंट साइन किया. ईशा आउटरीच की टीम ने प्रस्तावित शवदाह गृह का प्रेजेंटेशन भी दिया, जिसमें इसकी संरचना और सुविधाओं की जानकारी साझा की गई.
धार्मिक परंपराओं के साथ आधुनिक व्यवस्था
महापौर सीता साहू ने कहा कि यह परियोजना समय की जरूरत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक अंतिम संस्कार की प्रारंभिक प्रक्रियाओं को यथावत रखते हुए दाह संस्कार एलपीजी आधारित प्रणाली से किया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं का सम्मान बनाए रखने के लिए सीमित मात्रा में लकड़ी का उपयोग भी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे लकड़ी और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता घटेगी और लोगों को अधिक स्वच्छ, सम्मानजनक और व्यवस्थित सुविधा मिलेगी.
1 रुपए के लीज पर मिली जमीन
नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बताया कि समझौते के तहत ईशा आउटरीच इस शवदाह गृह का डिजाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव करेगी. इस परियोजना के लिए बिहार सरकार ने दीघा घाट पर 2.11 एकड़ जमीन 33 वर्षों के लिए प्रतीकात्मक रूप से 1 रुपए के लीज पर उपलब्ध कराई है.
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा परिसर
प्रस्तावित शवदाह गृह में चार एलपीजी फर्नेस लगाए जाएंगे. इसके अलावा प्रतीक्षालय, प्रशासनिक भवन, आवश्यक सुविधाएं, मंदिर और आकर्षक लैंडस्केपिंग भी विकसित की जाएगी. इस परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पर्यावरण अनुकूल होगी, बल्कि शोक संतप्त परिजनों को भी बेहतर और गरिमापूर्ण सुविधाएं मिल सकेंगी.