आज के दौर में जहां शादी में लग्जरी कारों का काफिला, तेज डीजे और करोड़ों का दिखावा आम बात हो गई है, वहीं झारखंड के बोकारो में एक ऐसी बारात निकली जिसने हर किसी को चौंका दिया. यहां दूल्हा न लग्जरी कार में बैठा, न दहेज लिया. वह बैलगाड़ी पर बारात लेकर पहुंचा और दुल्हन की विदाई भी उसी बैलगाड़ी से हुई. इस अनोखी शादी की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है. यहां दूल्हा न लग्जरी कार से पहुंचा और न ही दहेज लिया. वह बैलगाड़ी पर बारात लेकर पहुंचा और शादी के बाद दुल्हन की विदाई भी उसी बैलगाड़ी से हुई.
दरअसल, बोकारो जिले के कसमार प्रखंड के तेलियाडीह टांगटोना निवासी जनार्दन कुमार महतो की शादी मुंगो बगदा निवासी श्वेता कुमारी के साथ हुई. इस विवाह की सबसे खास बात यह रही कि दोनों परिवारों ने बिना दहेज के शादी करने का फैसला किया. शादी पूरी तरह सादगी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई. दूल्हा फूलों से सजी बैलगाड़ी पर बारात लेकर दुल्हन के गांव पहुंचा. बारात में डीजे की जगह कुड़माली लोक धुनों की मधुर आवाज सुनाई दी. बाराती घोड़ा नाच के साथ पैदल चलते हुए शादी समारोह तक पहुंचे. शादी के बाद दुल्हन की विदाई भी उसी सजी हुई बैलगाड़ी से की गई. इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ जुटी रही.
ग्रामीणों ने मिलकर बनाया आयोजन यादगार
इस खास शादी को सफल बनाने में गांव के लोगों ने भी अहम भूमिका निभाई. मंजूरा निवासी मिथिलेश महतो ने बैलगाड़ी का रंग-रोगन किया. वहीं डुमरकुदर निवासी भुवनेश्वर महतो और उनके साथियों ने फूलों और पारंपरिक सजावट से बैलगाड़ी को आकर्षक रूप दिया. उनकी मेहनत ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया.
समाज को दिया सकारात्मक संदेश
विवाह की सभी रस्में कुड़माली समाज की पारंपरिक नेगचार के अनुसार पूरी की गईं. दूल्हा-दुल्हन और दोनों परिवारों ने साफ संदेश दिया कि शादी एक पवित्र संस्कार है, न कि लेन-देन का माध्यम. यह अनोखी शादी दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत पहल बनकर सामने आई है. साथ ही इसने यह भी दिखाया कि सादगी, संस्कार और अपनी संस्कृति का सम्मान ही किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत होती है.
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