इन दिनों एलपीजी गैस को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. कुछ जगहों से ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि लोग जरूरत से ज्यादा गैस सिलेंडर बुक कर रहे हैं और घरों में अतिरिक्त स्टॉक जमा कर रहे हैं. हालांकि सरकार ने साफ किया है कि देश में एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है. रोजाना लाखों सिलेंडर घरों तक पहुंचाए जा रहे हैं और आमतौर पर बुकिंग के दो से तीन दिन के अंदर डिलीवरी भी मिल रही है.
इसके बावजूद कुछ इलाकों में गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आई हैं. ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन कार्रवाई कर रहे हैं. इसी वजह से लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर घर में कितने गैस सिलेंडर रखना नियमों के अनुसार सही माना जाता है और जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा करने पर क्या कार्रवाई हो सकती है.
घरेलू कनेक्शन पर कितने सिलेंडर की अनुमति
एक घरेलू गैस कनेक्शन पर 14.2 किलो के दो सिलेंडर रखने की अनुमति होती है. इनमें से एक सिलेंडर रसोई में इस्तेमाल के लिए लगाया जाता है, जबकि दूसरा सिलेंडर बैकअप के तौर पर रखा जाता है. जब पहला सिलेंडर खत्म हो जाता है तो तुरंत दूसरा सिलेंडर इस्तेमाल किया जा सकता है. यही सिस्टम ज्यादातर गैस कंपनियों के घरेलू कनेक्शन में लागू होती है, जिससे उपभोक्ताओं को बिना किसी परेशानी के गैस की सुविधा मिलती रहती है.
कब मानी जाती है सिलेंडर की जमाखोरी
अगर कोई व्यक्ति अपनी घरेलू जरूरत से कहीं ज्यादा एलपीजी सिलेंडर जमा कर लेता है तो इसे जमाखोरी माना जा सकता है. खासकर तब जब घर या किसी गोदाम में कई भरे हुए सिलेंडर एक साथ रखे मिले.
इसके अलावा बुकिंग के नियमों का गलत फायदा उठाना, घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल व्यावसायिक काम में करना या फिर सिलेंडर को अधिक कीमत पर बेचने की कोशिश करना भी जमाखोरी या कालाबाजारी की कैटेगरी में आ सकता है.
जमाखोरी करने पर सख्त कार्रवाई
भारत में एलपीजी गैस को जरूरी वस्तुओं की कैटेगरी में आता है. इसलिए इसकी जमाखोरी या कालाबाजारी को कानून गंभीर अपराध मानता है. यदि किसी व्यक्ति के पास जरूरत से ज्यादा सिलेंडर पाए जाते हैं तो प्रशासन उन सिलेंडरों को जब्त कर सकता है.
इसके अलावा जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ केस भी दर्ज किया जा सकता है. कानून के तहत दोषी पाए जाने पर तीन महीने से लेकर सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है और इसके साथ आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है.