त्योहारों का मौसम आते ही मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है. कुछ लोग घर पर मिठाई बनाना पसंद करते हैं. घर पर मिठाई बनाने के लिए मावा यानी खोया भी खूब खरीदा जाता है. लेकिन इसी समय मिलावटी मावे का खतरा भी बढ़ सकता है. वजह सिर्फ एक कि डिमांड ज्यादा होती है, और मुनाफा कमाने का मौका बढ़ जाता है. इसी कारण मिलावटी मावा ज्यादा बाजार में होता है. ऐसे में सिर्फ देखकर असली और नकली मावे की पहचान करना हमेशा आसान नहीं होता. फिर भी रंग, बनावट, खुशबू और स्वाद पर ध्यान देकर काफी हद तक सावधानी बरती जा सकती है.
असली मावा आमतौर पर हल्के क्रीम या सफेद रंग का होता है. इसकी बनावट नरम और थोड़ी दानेदार होती है. अगर मावा बहुत ज्यादा चमकीला, बहुत सफेद या अजीब रंग का दिख रहा है, तो सावधान रहें. इसे हल्के हाथ से दबाकर भी देखें. बहुत सख्त, रबड़ जैसा या ज्यादा खिंचने वाला मावा लेने से बचना बेहतर है.
असली और ताजा मावे में दूध जैसी हल्की खुशबू आती है. अगर मावे से तेज केमिकल, साबुन जैसी या कोई अजीब गंध आ रही है, तो उसे न खरीदें. हालांकि केवल खुशबू से मावे की शुद्धता तय नहीं की जा सकती. इसलिए दूसरे रेड फ्लैग भी जरूर देखें.
अगर दुकानदार मावा चखने की अनुमति देता है, तो थोड़ा सा स्वाद देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है. असली मावे का स्वाद हल्का दूधिया और थोड़ा मीठा होता है. कड़वा, साबुन जैसा या बहुत अलग स्वाद मिलने पर मावा न खरीदें. ध्यान रखें कि स्वाद भी मिलावट की पक्की जांच नहीं है.
मावे में स्टार्च की मिलावट का शुरुआती पता लगाने के लिए आयोडीन टेस्ट किया जा सकता है. थोड़े से मावे को पानी में मिलाकर गर्म करें और ठंडा होने दें. इसके बाद आयोडीन की कुछ बूंदें डालें. अगर मिश्रण नीला या नीला-काला हो जाए, तो उसमें स्टार्च होने का संकेत मिल सकता है. यह केवल घरेलू जांच है और इससे हर तरह की मिलावट का पता नहीं चलता.
मावा हमेशा किसी भरोसेमंद मिठाई की दुकान, डेयरी या दुकानदार से खरीदना बेहतर है. बहुत कम कीमत वाला मावा लेने से पहले सावधान रहें. पैक्ड मावा खरीदते समय पैकेट, तारीख और स्टोरेज से जुड़ी जानकारी जरूर देखें. अगर रंग, गंध या बनावट पर शक हो, तो उसे इस्तेमाल न करें.