मटर और मूंगफली के छिलकों से खाद बनाना न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह आपके पौधों को पोषण भी प्रदान करता है. सर्दियों के मौसम में मटर और मूंगफली का उपयोग हर घर में होता है, लेकिन इनके छिलकों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. इन छिलकों को कैसे उपयोग में लाकर ऑर्गेनिक खाद बनाई जा सकती है. आइए बताते हैं कि कैसे बनाएं खाद.
बाल्टी में लेयरिंग
पहले तरीके में एक बाल्टी का उपयोग किया गया है. बाल्टी की तली में छेद करके, सबसे पहले मिट्टी की एक परत डाली जाती है. इसके बाद मूंगफली के छिलकों को मिक्सी में पीसकर या क्रश करके एक परत बनाई जाती है. फिर मटर के ताजे छिलकों की परत डाली जाती है. हर परत के बाद मिट्टी का छिड़काव किया जाता है. इस प्रक्रिया को तब तक दोहराया जाता है जब तक बाल्टी भर न जाए. अंत में गुड़ का घोल डालकर खाद को जल्दी डीकंपोज करने में मदद की जाती है. लगभग 15-20 दिनों में खाद तैयार होने लगती है.
ग्रो बैग का उपयोग
दूसरे तरीके में ग्रो बैग का उपयोग किया गया है. राशन के बैग को गोल आकार में बांधकर, सबसे पहले मिट्टी की परत डाली जाती है. मटर के छिलकों को 5-7 दिनों तक धूप में सुखाकर उपयोग किया जाता है. छिलकों की परत डालने के बाद मिट्टी और खाद का छिड़काव किया जाता है. ग्रो बैग को आधा भरने के बाद ऊपर की परत के लिए सॉइल मिक्स तैयार किया जाता है. इसमें टमाटर जैसे पौधे लगाए जा सकते हैं. छिलके धीरे-धीरे डीकंपोज होकर पौधों को पोषण प्रदान करते हैं.
मूंगफली के छिलकों का मिक्सचर
तीसरे तरीके में मूंगफली के छिलकों को गोबर की खाद के साथ मिलाकर मिक्सचर तैयार किया जाता है. छिलकों को पहले क्रश या पीसकर पाउडर बनाया जाता है. समान मात्रा में गोबर की खाद मिलाकर, गुड़ का घोल डाला जाता है. इस मिक्सचर को बैग में भरकर छांव में रखा जाता है. नमी बनाए रखने के लिए पानी का छिड़काव किया जाता है. लगभग एक महीने में यह खाद तैयार हो जाती है.