Advertisement

क्या सच में रेड एलोवेरा है स्किन केयर के लिए है बेहतर? यहां जानें इसके फायदे

रेड एलोवेरा, जिसे एलो कैमरूनी भी कहा जाता है, मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है. इसका लाल रंग किसी अलग प्रजाति का संकेत नहीं, बल्कि तेज धूप के कारण होने वाला प्राकृतिक बदलाव है. यानी यह आम एलोवेरा का ही एक रूप माना जा सकता है.

red aloe vera
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST

सनबर्न से राहत दिलाना हो या त्वचा को ठंडक पहुंचाने के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल सालों से किया जाता रहा है. लेकिन अब स्किनकेयर की दुनिया में एक नया नाम तेजी से उभर रहा है रेड एलोवेरा. बाजार में इसके फेस वॉश, क्रीम, जेल और अंडर-आई प्रोडक्ट्स की भरमार देखी जा रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या रेड एलोवेरा वाकई ज्यादा असरदार है या यह सिर्फ एक नया ट्रेंड है?

क्या है रेड एलोवेरा?
रेड एलोवेरा, जिसे एलो कैमरूनी भी कहा जाता है, मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है. इसका लाल रंग किसी अलग प्रजाति का संकेत नहीं, बल्कि तेज धूप के कारण होने वाला प्राकृतिक बदलाव है. यानी यह आम एलोवेरा का ही एक रूप माना जा सकता है.

भारत में भी संभव है इसकी खेती
विशेषज्ञों के अनुसार, रेड एलोवेरा को भारत के गर्म और शुष्क इलाकों जैसे राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में आसानी से उगाया जा सकता है. जहां पहले से एलोवेरा की खेती होती है, वहां इसके लिए भी अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं.

स्किन के लिए क्यों खास माना जा रहा है?
रेड एलोवेरा का जेल सामान्य एलोवेरा की तुलना में ज्यादा गाढ़ा और पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसमें पॉलीसैकराइड की मात्रा अधिक होती है, जो त्वचा को हाइड्रेट रखने और रिपेयर करने में मदद करते हैं. इसके अलावा, इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और एंथ्राक्विनोन्स (जैसे एलोइन और इमोडीन) ज्यादा पाए जाते हैं, जो सूजन कम करने, बैक्टीरिया से लड़ने और दर्द को कम करने में सहायक माने जाते हैं. यही कारण है कि कई लोग इसे एक्ने, एक्जिमा और संवेदनशील त्वचा के लिए फायदेमंद बता रहे हैं.

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अभी इस पर पर्याप्त वैज्ञानिक शोध नहीं हुआ है. इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि रेड एलोवेरा, ग्रीन एलोवेरा से बेहतर है. साथ ही बाजार में मिलने वाले सस्ते रेड एलो प्रोडक्ट्स पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इसकी असली किस्म महंगी होती है और कई उत्पाद नकली या मिलावटी हो सकते हैं.

ये भी पढ़ें: 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement