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कब्र, सिंदूर और अफवाह… 15 दिन दहशत में रहा गांव, खुदाई में निकली कुत्ते की लाश, हैरान कर देगा मामला

कब्र के पास जले दीपक, अगरबत्ती, फूल-माला और सिक्के देखकर ग्रामीणों में यह अफवाह फैल गई कि किसी की हत्या कर शव को यहां दफनाया गया है. नतीजा, पूरा गांव करीब 15 दिन तक दहशत के साये में रहा. लेकिन फिर 15 दिनों बाद जब उस जगह की खुदाई हुई तो कुछ ऐसा निकला की पूरे गांव ने अपना माथा ठोक लिया. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.

Narayanpur
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:51 PM IST

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर मेरोली नदी के पास बनी एक संदिग्ध कब्र ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी. कब्र के पास जले दीपक, अगरबत्ती, फूल-माला और सिक्के देखकर ग्रामीणों में यह अफवाह फैल गई कि किसी की हत्या कर शव को यहां दफनाया गया है. नतीजा, पूरा गांव करीब 15 दिन तक दहशत के साये में रहा. लेकिन फिर 15 दिनों बाद जब उस जगह की खुदाई हुई तो कुछ ऐसा निकला की पूरे गांव ने अपना माथा ठोक लिया. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.

मामला तब और गंभीर हो गया जब गांव में किसी की मौत की कोई जानकारी सामने नहीं आई. बोरपाल गांव के सरपंच परमानंद नाग ने एड़का पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई. सरपंच ने पुलिस को बताया कि गांव में हाल के दिनों में किसी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है, इसके बावजूद अज्ञात शव के दफनाए जाने की आशंका है. शिकायत के बाद एड़का थाना प्रभारी सुदर्शन घ्रुव के नेतृत्व में मामले की जांच शुरू हुई. पुलिस ने जिला अस्पताल, मिशन अस्पताल और आसपास के थानों में दर्ज गुम इंसान के मामलों की पड़ताल की. मुसाफिर नाम सहित तमाम रिकॉर्ड खंगाले गए, लेकिन कोई भी मामला संदिग्ध कब्र से मेल नहीं खा सका.

15 दिनों गांव में दहशत का माहौल
कब्र के पास पूजा सामग्री मिलने से हत्या और अपराध की आशंका और गहराने लगी. हालात को देखते हुए कांकेर जिले से एफएसएल की तीन सदस्यीय टीम को मौके पर बुलाया गया. टीम का नेतृत्व डॉ. कन्नौजे कर रहे थे. वहीं जिला अस्पताल से डॉ. प्रवीण चंद्र भंडारी और बेनूर स्वास्थ्य केंद्र से डॉ. दीप्ति भी घटनास्थल पर पहुंचे. पूरी कार्रवाई कार्यपालिक मजिस्ट्रेट वेद प्रकाश साहू की मौजूदगी में की गई.

कब्र से निकला कुत्ता
प्रशासन और पुलिस की निगरानी में, करीब 150 से 200 ग्रामीणों के सामने कब्र की खुदाई कराई गई. जैसे ही कब्र खोली गई, सच्चाई सामने आ गई. वहां किसी इंसान का नहीं, बल्कि एक काले कुत्ते का शव दफन मिला. इसके बाद पुलिस ने शव को दोबारा दफना दिया. चार दिनों तक चली जांच के बाद मामला शांत हुआ. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अफवाहों और रहस्यमय हालातों की वजह से गांव में लंबे समय तक डर का माहौल बना रहा.

पुलिस ने साफ कहा है कि मामले में किसी भी तरह के आपराधिक साक्ष्य नहीं मिले हैं. साथ ही लोगों से अपील की गई है कि अफवाहों पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें. यह घटना एक बार फिर बताती है कि अफवाहें कैसे पूरे गांव को दहशत में डाल सकती हैं और सच्चाई सामने आने में वक्त लग सकता है.

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