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33 साल तक सिस्टम को बनाता रहा बेवकूफ..फर्जी डॉक्यूमेंट दिखाकर ली 2 सरकारी नौकरियां, अब कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

जांच में यह भी सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग की नौकरी छोड़े बिना ही जयप्रकाश सिंह ने 19 जून 1993 को बाराबंकी जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली. इसके बाद वह प्रमोशन पाकर प्राथमिक विद्यालय मल्लोली, विकास खंड हरख में प्रधानाध्यापक के पद तक पहुंच गया.

UP Man Holds Two Government Jobs
gnttv.com
  • बाराबंकी,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:05 PM IST

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सरकारी सिस्टम की बड़ी चूक का मामला सामने आया है. एक व्यक्ति करीब 33 साल तक दो अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी करता रहा, दोनों जगह से वेतन और सरकारी सुविधाएं लेता रहा, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी. आखिरकार RTI से हुए खुलासे और लंबी जांच के बाद मामला अदालत पहुंचा और अब कोर्ट ने आरोपी को 7 साल की सजा सुनाई है.

शिकायत से शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत 20 फरवरी 2009 को हुई, जब बाराबंकी शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रभात सिंह ने कोतवाली नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव निवासी जयप्रकाश सिंह ने फर्जी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए दो अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी हासिल कर रखी है और लंबे समय से दोनों जगह से वेतन ले रहा है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर अपराध संख्या 277/2009 दर्ज कर मामले की जांच शुरू की.

RTI से खुला बड़ा राज
मामले की पड़ताल के दौरान सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया. जांच में पता चला कि जयप्रकाश सिंह पहले से ही प्रतापगढ़ जिले के स्वास्थ्य विभाग में नौकरी कर रहा था, लेकिन इसके बावजूद उसने दूसरी सरकारी नौकरी भी हासिल कर ली थी.

1979 में पहली नौकरी
दस्तावेजों के अनुसार जयप्रकाश सिंह की पहली नियुक्ति 26 दिसंबर 1979 को प्रतापगढ़ जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सांगीपुर में नॉन मेडिकल असिस्टेंट (NMA) के पद पर हुई थी. वह इस पद पर रहते हुए नियमित रूप से सरकारी वेतन और अन्य सुविधाएं प्राप्त कर रहा था.

1993 में दूसरी सरकारी नौकरी
जांच में यह भी सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग की नौकरी छोड़े बिना ही जयप्रकाश सिंह ने 19 जून 1993 को बाराबंकी जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली. इसके बाद वह प्रमोशन पाकर प्राथमिक विद्यालय मल्लोली, विकास खंड हरख में प्रधानाध्यापक के पद तक पहुंच गया. यानी एक ही समय में वह स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग दोनों में सरकारी कर्मचारी बना रहा.

दोनों विभागों से उठाता रहा फायदा
अदालत में पेश दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से यह साबित हुआ कि आरोपी दोनों विभागों से वेतन, भत्ते और अन्य सरकारी सुविधाएं लेता रहा. जांच में यह भी सामने आया कि उसने स्वास्थ्य विभाग से विधिवत त्यागपत्र दिए बिना ही दूसरी सरकारी नौकरी हासिल की थी.

अदालत में पेश हुए कई गवाह
मामले में पुलिस जांच के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों को पेश किया और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के सामने रखे. अदालत ने पाया कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी के जरिए सरकार को गुमराह कर दो-दो सरकारी नौकरियां हासिल कीं और लंबे समय तक सरकारी धन का लाभ उठाया.

अदालत ने सुनाई सख्त सजा
सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट नंबर-18, बाराबंकी की जज सुधा सिंह ने आरोपी जयप्रकाश सिंह को दोषी करार दिया.

अभियोजन अधिकारी ने क्या कहा
बाराबंकी के वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी अनार सिंह ने बताया कि वर्ष 2009 में मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी प्रतापगढ़ में स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करते हुए बाराबंकी में शिक्षक के पद पर भी कार्यरत था. उन्होंने कहा कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए सजा और जुर्माना लगाया है.  करीब 17 साल तक चले मुकदमे के बाद अब जाकर अदालत ने अपना फैसला सुनाया है.

रिपोर्ट-सैयद रेहान मुस्तफा रिजव

 

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