धर्म

भविष्य बद्री में पत्थर पर प्रकट हो रही भगवान विष्णु की मूर्ति, स्कंद पुराण में उल्लेख- जब बद्रीनाथ जाना मुश्किल होगा, तब यहीं होंगे बद्री विशाल के दर्शन

gnttv.com
  • चमोली,
  • 13 मार्च 2026,
  • Updated 11:39 AM IST
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भविष्य बद्री मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बन गया है. जोशीमठ से करीब 28 किलोमीटर दूर देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित इस पवित्र मंदिर में इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. चारों धाम के शीतकालीन कपाट बंद हो चुके हैं, लेकिन भविष्य बद्री मंदिर अभी भी श्रद्धालुओं के लिए खुला है.

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पहले इस मंदिर तक पहुंचना काफी कठिन माना जाता था. सड़क मार्ग नहीं होने के कारण यहां बहुत कम लोग आ पाते थे. लेकिन अब सड़क बनने के बाद स्थिति बदल गई है. जोशीमठ से वाहन से करीब 28 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद श्रद्धालुओं को लगभग 500 मीटर की चढ़ाई करनी पड़ती है और फिर वे भगवान के दरबार तक पहुंच जाते हैं. बेहतर सुविधा होने के बाद अब हर साल यहां एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.

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मंदिर परिसर में हर समय भक्ति का माहौल बना रहता है. कहीं घंटियों की आवाज सुनाई देती है तो कहीं भक्त भजन गाते और झूमते नजर आते हैं. श्रद्धालु नाचते-गाते हुए भगवान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पूरे परिसर में आस्था और उत्साह का वातावरण दिखाई देता है.

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मंदिर के पुजारी पंकज खंडवाल के अनुसार इस मंदिर का सबसे बड़ा चमत्कार गर्भगृह में स्थित वह शिला है, जिस पर भगवान विष्णु का स्वयंभू स्वरूप उभर रहा है. कुछ साल पहले इस शिला पर केवल हल्की आकृतियां दिखाई देती थीं, लेकिन अब चतुर्भुज स्वरूप साफ नजर आने लगा है. मान्यता है कि कलयुग में जब बद्रीनाथ मंदिर का मार्ग दुर्गम हो जाएगा और वहां दर्शन करना कठिन हो जाएगा, तब भगवान बद्री विशाल के दर्शन भविष्य बद्री मंदिर में ही होंगे.

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धार्मिक ग्रंथ स्कंद पुराण के केदारखंड में भी इसका उल्लेख मिलता है. मान्यता है कि जब नरसिंह मंदिर, जोशीमठ में भगवान नृसिंह की बाईं भुजा पूरी तरह क्षीण हो जाएगी, तब नर और नारायण पर्वत एक हो जाएंगे और बद्रीनाथ के दर्शन भविष्य बद्री में होंगे. आज गर्भगृह की उस शिला को देखकर श्रद्धालुओं को लगता है कि यह प्राचीन भविष्यवाणी धीरे-धीरे साकार हो रही है.