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धर्म

बुंदेलखंड की धरती पर लिखी गई होली की असली कहानी, इसी नगर में जला था अहंकार और जीती थी भक्ति, जानिए प्रह्लाद, होलिका और भगवान नरसिंह की पूरी गाथा

gnttv.com
  • झांसी,
  • 24 फरवरी 2026,
  • Updated 4:00 PM IST
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झांसी पूरे देश में रंगों और उमंग का पर्व होली हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि बुराई पर अच्छाई की जीत के इस महापर्व की जड़ें बुंदेलखंड की पवित्र माटी से जुड़ी मानी जाती हैं. झांसी मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित एरच कस्बा कोई साधारण स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय मान्यताओं और पौराणिक परंपराओं के अनुसार वही तपोभूमि है जहां भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति ने अहंकार को पराजित किया था. कहा जाता है कि यहीं पहली बार होलिका दहन हुआ और इसी धरती पर भगवान विष्णु ने खंभे से प्रकट होकर 'नरसिंह' अवतार लिया था, अत्याचारी हिरण्यकश्यप का अंत किया था.
 

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इतिहास, आस्था और लोकविश्वास का यह संगम एरच को एक विशेष पहचान देता है. यहां आज भी होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं, फाग गीतों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ एक सांस्कृतिक विरासत के रूप में मनाई जाती है. बुंदेलखंड की यह धरा हर वर्ष मानो उस पौराणिक कथा को जीवंत कर देती है, जब भक्ति ने सत्ता को चुनौती दी और सत्य की विजय हुई.
 

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पुराणों के अनुसार एरच नगर के राजा हिरण्यकश्यप को वरदान प्राप्त था कि वह न दिन में मरेगा, न रात में; न मनुष्य से, न पशु से; न घर के भीतर, न बाहर. इस वरदान के बाद उसका अत्याचार बढ़ गया. लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का परम भक्त था. पिता ने पुत्र को विष देने, सर्पों के बीच डालने, पर्वत से गिराने और अग्नि में बैठाने जैसे अनेक प्रयास किए, लेकिन हर बार प्रह्लाद भगवान की कृपा से सुरक्षित बच गया. हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान था. वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, किंतु ईश्वरीय लीला से अग्नि-रक्षक वस्त्र प्रह्लाद पर आ गया और होलिका स्वयं दहन हो गई. इसी घटना की स्मृति में आज भी फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन होली का उत्सव पूरे विश्व भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.
 

इसके बाद भगवान विष्णु ने भगवान नरसिंह के रूप में प्रकट होकर संध्या बेला में हिरण्यकश्यप का वध किया. स्थानीय मान्यता है कि यह घटना एरच क्षेत्र के डिकोली पर्वत और किले की देहरी से जुड़ी है.
 

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तीन अवतारों से जुड़ी आस्था
स्थानीय संतों और विद्वानों का दावा है कि एरच की भूमि भगवान विष्णु के तीन प्रमुख अवतारों वराह अवतार, नरसिंह अवतार और वामन अवतार से जुड़ी रही है. ऐसी मान्यता है कि, यह स्थान विश्व की प्रथम राजधानी और अनेक धार्मिक घटनाओं का केंद्र रहा है. नौ देवी शक्तिपीठ, किलागढ़ी हनुमान मंदिर और प्राचीन खंभों वाला मठ आज भी इन कथाओं की जीवित स्मृतियां माने जाते हैं.
 

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स्थानीय विधायक जवाहरलाल राजपूत का दावा है कि एरच का इतिहास लगभग 2500 वर्ष पुराना है. उनके अनुसार, दुनिया में सबसे पहले होली की शुरुआत यहीं से हुई. वे बताते हैं कि यहां भगवान ने नरसिंह, वराह और वामन रूप में अवतार लिया. विरासत संरक्षण के लिए घाट निर्माण, प्रतिमा स्थापना और सांस्कृतिक विकास की योजनाएं भी प्रस्तावित हैं.
 

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महंत उमेश दत्त सांडिल गिरी एरच को विश्व की प्रथम राजधानी और अनेक धार्मिक घटनाओं का केंद्र बताते हैं. उनके अनुसार यह भूमि वराह अवतार, नरसिंह अवतार और वामन अवतार से जुड़ी है. नौ देवी शक्तिपीठ, वैष्णवी माता और प्राचीन खंभों वाला मठ आज भी इन कथाओं के साक्ष्य माने जाते हैं.

रिपोर्ट- अजय झा

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