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बारिश के बाद भी नहीं थमा कृष्ण भक्तों का उत्साह, द्वारका में दिखा भक्ति और AI का अनोखा संगम

gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2026,
  • Updated 3:43 PM IST
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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) द्वारा नई दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 में 3 और 4 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में इस बार भक्ति के साथ आधुनिक तकनीक का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने बच्चों से लेकर युवाओं और परिवारों तक को आकर्षित किया. द्वारका के डीडीए ग्राउंड में आयोजित इस भव्य समारोह में बारिश के बाद भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ. 

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हजारों श्रद्धालु और दर्शक कृष्ण की लीलाओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और तकनीक से तैयार किए गए आकर्षणों को देखने पहुंचे. आयोजन में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया था. करीब 3.75 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में तैयार की गई 'कृष्ण नगरी' में अध्यात्म, भारतीय संस्कृति और डिजिटल तकनीक एक साथ नजर आई.
 

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इस महोत्सव में 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं और दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद के साथ व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई थीं. आयोजन को सफल बनाने के लिए 3 हजार से ज्यादा सेवादार और स्वयंसेवक जुटे रहे, जबकि 250 से अधिक कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. दो दिनों में 15 भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं. आयोजन की तैयारी और संचालन में 3 लाख से ज्यादा मैन-आवर्स लगाए गए. 

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बारिश के बाद मैदान में मौसम की चुनौती के बावजूद लोगों की मौजूदगी और उत्साह देखने लायक रहा. परिवारों के साथ बड़ी संख्या में बच्चे भी पहुंचे और उन्होंने अलग-अलग इंटरैक्टिव गतिविधियों में हिस्सा लिया. इस महोत्सव की सबसे खास बात थी Ancient Roots, Future Routes थीम पर तैयार किया गया AI-powered pavilion. यहां श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की कथाओं और शिक्षाओं से जुड़ी जानकारी आधुनिक तकनीक के जरिए दी गई. AI कृष्ण अवतार इस पवेलियन का प्रमुख आकर्षण रहा, जहां लोग सवाल पूछ सकते थे और इंटरैक्टिव ऑडियो अनुभव के जरिए जवाब प्राप्त कर सकते थे. 

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पहले दिन द ग्रेट खली, दूसरे दिन CM रेखा गुप्ता पहुंचीं
महोत्सव में कई जानी-मानी हस्तियों ने भी शिरकत की. पहले दिन मशहूर रेसलर द ग्रेट खली आयोजन में पहुंचे, जबकि दूसरे दिन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उनके साथ पश्चिमी दिल्ली की सांसद कमलजीत सहरावत भी मौजूद रहीं. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भव्य आयोजन के लिए दिल्लीवासियों और DJJS का आभार जताया. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को लोगों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं. बड़ी संख्या में मौजूद दर्शकों ने भी अतिथियों का उत्साह के साथ स्वागत किया.
 

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कृष्ण नगरी में दिखी परंपरा और भविष्य की तस्वीर
दो दिनों तक चले इस आयोजन ने यह दिखाया कि धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव आधुनिक तकनीक के साथ किस तरह नई पीढ़ी तक पहुंच सकते हैं. एक तरफ जहां कृष्ण की बाल लीलाएं, गोवर्धन पूजा और भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं मौजूद थीं, वहीं दूसरी तरफ AI, hologram, VFX, augmented reality और interactive games जैसे आधुनिक माध्यमों ने इन्हें नया रूप दिया.
 

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बारिश के बाद भी श्रद्धालुओं की भीड़ और बच्चों का उत्साह इस प्रयोग की सफलता को दिखाता रहा. कुल मिलाकर द्वारका का यह कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव भक्ति, संस्कृति और तकनीक के मेल का ऐसा मंच बना, जहां पारंपरिक कृष्ण कथाओं को डिजिटल दौर की भाषा में लोगों के सामने पेश किया गया और दो दिनों तक पूरा परिसर कृष्ण भक्ति के रंग में रंगा नजर आया.

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100 फीट से ज्यादा ऊंचा डिजिटल स्टेज बना आकर्षण
महोत्सव का मुख्य मंच भी तकनीक के लिहाज से खास रहा. 100 फीट से ज्यादा ऊंचे डिजिटल स्टेज पर करीब 3 हजार वर्ग फुट के मेगा LED स्क्रीन लगाए गए थे. सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में 8K 3D प्रोजेक्शन, VFX और डिजिटल वातावरण का इस्तेमाल किया गया. इनके जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ भारतीय कला, संस्कृति, विरासत और प्राकृतिक दृश्यों को दर्शाया गया. 
 

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माखन चोरी से लेकर गोवर्धन पर्वत तक, सब कुछ डिजिटल अंदाज में
बच्चों के लिए भी महोत्सव में कई तकनीक आधारित गतिविधियां तैयार की गई थीं. AI-enabled slingshot experience के जरिए भगवान कृष्ण की माखन की मटकी फोड़ने वाली बाल लीलाओं को मनोरंजक अंदाज में दिखाया गया. वहीं Makhan Hunt गेम ने बाल कृष्ण के माखन प्रेम से जुड़ी कहानियों को इंटरैक्टिव रूप दिया. एक अन्य प्रमुख आकर्षण में भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की लीला को immersive AI experience के जरिए प्रस्तुत किया गया. इस इंस्टॉलेशन के अंदर खड़े होकर लोग खुद को इस पौराणिक दृश्य का हिस्सा महसूस कर सकते थे और अपनी तस्वीर भी ले सकते थे. इस तरह पारंपरिक कथाएं सिर्फ देखने की चीज नहीं रहीं, बल्कि लोगों को उनमें शामिल होने का अनुभव भी मिला.
 

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इस महोत्सव की एक खास बात सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी रहीं. ये प्रस्तुतियां पेशेवर कलाकारों द्वारा केवल व्यावसायिक मनोरंजन के लिए नहीं की गईं, बल्कि DJJS के मुताबिक, दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के ब्रह्मज्ञानी शिष्यों ने सेवादार के रूप में इनमें हिस्सा लिया. सैकड़ों डांसर, संगीतकार और अन्य कलाकारों ने मंच पर अपनी कला के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक संदेश को जीवंत किया. इन प्रस्तुतियों की तैयारी भी कई महीनों पहले शुरू कर दी गई थी. कलाकारों ने लगातार रिहर्सल और अभ्यास के जरिए कार्यक्रम को भव्य रूप देने की तैयारी की.

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बारिश के बाद भी श्रद्धालुओं की भीड़ और बच्चों का उत्साह इस प्रयोग की सफलता को दिखाता रहा. कुल मिलाकर द्वारका का यह कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव भक्ति, संस्कृति और तकनीक के मेल का ऐसा मंच बना, जहां पारंपरिक कृष्ण कथाओं को डिजिटल दौर की भाषा में लोगों के सामने पेश किया गया और दो दिनों तक पूरा परिसर कृष्ण भक्ति के रंग में रंगा नजर आया.

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