Advertisement

धर्म

कांवड़ियों की अनोखी भक्ति, 200 किलो की कांवड़ में राम-रावण की थीम, 70 किलो की कांवड़ में जीव-जंतुओं का संदेश, दंडवत यात्रा कर रही प्रियंका

गोविंद कुमार
  • मुंगेर,
  • 19 अगस्त 2026,
  • Updated 11:58 AM IST
1/5

कहते हैं महादेव की महिमा और शक्ति अपार है. सावन के पावन महीने में मुंगेर के असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर शिवभक्ति का ऐसा ही अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है. सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर हजारों शिवभक्त 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं. इस यात्रा में श्रद्धा के साथ कांवड़ों की कलात्मकता भी लोगों का ध्यान खींच रही है. किसी कांवड़ में भगवान विष्णु की विशाल प्रतिमा योगनिद्रा की मुद्रा में है, तो किसी में भगवान श्रीराम को भगवान शिव की पूजा करते हुए दिखाया गया है. कुछ कांवड़ भगवान महाकाल की भव्य प्रतिमा और कछुए की आकृति से भी सजाई गई हैं. इन अनोखी कांवड़ों को देखने के लिए कच्ची कांवरिया पथ पर लोगों की भीड़ जुट रही है.

2/5

पटना मछुआ टोली के श्रद्धालु सूरज कुमार साहनी पिछले 40 साल से बाबा धाम की यात्रा कर रहे हैं. इस बार उनके साथ 22 से 24 लोगों का समूह है. उनकी करीब 70 किलो वजनी कांवड़ में बिच्छू, सांप, कछुआ समेत कई जीव-जंतुओं को दर्शाया गया है. सूरज के मुताबिक, इस कांवड़ के जरिए पेड़-पौधों के साथ पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश दिया गया है. इसे तैयार करने में करीब 15 दिन लगे. कांवड़ बनाने में थर्माकोल, कॉटन, फेविकोल, रंग और कील का इस्तेमाल किया गया है. सूरज कुमार कहते हैं कि बाबा से मांगने की जरूरत नहीं पड़ती, बाबा बिना मांगे ही सब कुछ दे देते हैं.
 

3/5

वहीं हावड़ा, कोलकाता से आए राजकुमार साव भगवान श्रीराम और रावण से जुड़ी थीम वाली विशाल कांवड़ लेकर बाबा धाम जा रहे हैं. उनकी कांवड़ में वह प्रसंग दिखाया गया है, जब भगवान श्रीराम समुद्र तट पर भगवान शिव की पूजा कर रहे थे. करीब 200 किलो वजनी इस कांवड़ को तैयार करने में लगभग छह महीने की मेहनत लगी है. राजकुमार के जत्थे में 30 लोग शामिल हैं. कच्ची कांवरिया पथ से गुजरती इन विशाल और कलात्मक कांवड़ों को देखने के लिए श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों की भी भीड़ उमड़ रही है. आस्था, कला और सामाजिक संदेश से सजी ये कांवड़ियां सावन की भक्ति को खास बना रही हैं.

4/5

इसी यात्रा में मुंगेर जिले के असरगंज सतीस्थान की रहने वाली प्रियंका पहली बार दंडवत यात्रा कर रही हैं. यात्रा का यह चौथा दिन है. तपती राह, लंबा सफर और लगातार दंडवत चलने के बावजूद प्रियंका के चेहरे पर थकान के बजाय बाबा भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास नजर आ रहा है. उनके साथ दादा उदेव प्रसाद सिंह, दादी रेशमा देवी, भाई और परिवार के अन्य सदस्य भी बाबा धाम की यात्रा पर हैं. प्रियंका के माता-पिता मधु देवी और देवेन्द्र प्रसाद सिंह हैं.

5/5

प्रियंका का सपना बड़ा होकर शिक्षिका बनना है. उन्होंने बताया कि दीदी और दादा को बाबा धाम जाते देखकर उनके मन में भी दर्शन की इच्छा हुई. इसके बाद उन्होंने मन्नत मांगी और परिवार के साथ दंडवत यात्रा पर निकल पड़ीं. उनका कहना है कि उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है और उनका एक ही संकल्प है- बाबा धाम पहुंचना और अपनी मन्नत पूरी करना.

Advertisement

लेटेस्ट फोटो

Advertisement