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एशिया के सबसे बड़े कांवड़ मेले का आगाज, हर की पौड़ी पर उमड़ा आस्था का सैलाब, सुरक्षा में हजारों जवान तैनात

हरिद्वार में गंगा घाटों पर कांवड़ियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. शिवभक्त पैदल यात्रा करते हुए हर की पौड़ी पहुंच रहे हैं और यहां से गंगाजल लेकर भगवान शिव के अभिषेक के लिए निकल रहे हैं. मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

Haridwar kawad special
मुदित कुमार अग्रवाल
  • हरिद्वार,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:59 AM IST

श्रावण मास शुरू होने से पहले ही धर्मनगरी हरिद्वार शिवभक्ति में रंग गई है. गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर एशिया के सबसे बड़े कांवड़ मेले का शुभारंभ हो गया है. देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार पहुंच रहे हैं और पवित्र हर की पौड़ी से गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों की ओर रवाना हो रहे हैं. हालांकि श्रावण मास की शुरुआत 30 जुलाई से होगी, लेकिन कांवड़ियों के आने का सिलसिला अभी से तेज हो गया है.

हर की पौड़ी पर उमड़ा कांवड़ियों का हुजूम
हरिद्वार में गंगा घाटों पर कांवड़ियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. शिवभक्त पैदल यात्रा करते हुए हर की पौड़ी पहुंच रहे हैं और यहां से गंगाजल लेकर भगवान शिव के अभिषेक के लिए निकल रहे हैं. मान्यता है कि श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. धर्म के जानकारों के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान भगवान शिव कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में विराजमान रहते हैं और सृष्टि का संचालन करते हैं, क्योंकि इस समय भगवान विष्णु योग निद्रा में होते हैं.

11 अगस्त को शिवरात्रि पर होगा भगवान शिव का जलाभिषेक
कांवड़ यात्रा का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करना है. इस वर्ष 11 अगस्त को शिवरात्रि के अवसर पर कांवड़िये अपने-अपने शिवालयों में गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे. मान्यता है कि भक्त जब अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना भगवान शिव से करते हैं और उनकी इच्छा पूरी हो जाती है, तो वे अगले वर्ष फिर कांवड़ लेकर भोलेनाथ का अभिषेक करने आते हैं. इसी आस्था के साथ हजारों शिवभक्त कठिन पैदल यात्रा करते हुए हरिद्वार पहुंचते हैं.

कांवड़ मेले में दिख रहे हैं भक्ति के अनोखे रंग
इस बार कांवड़ मेले में भक्ति के कई अनोखे रूप देखने को मिल रहे हैं. कोई नोटों से सजी कांवड़ लेकर जा रहा है तो कोई घुटनों के बल चलकर भगवान शिव की भक्ति कर रहा है. कई भक्त श्रवण कुमार का रूप धारण कर अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर यात्रा कर रहे हैं. वहीं कुछ शिवभक्त अपने कंधों पर भोलेनाथ की प्रतिमा रखकर गंगाजल लेकर आगे बढ़ रहे हैं. कांवड़ियों के पहुंचने से पूरी धर्मनगरी भगवामय हो गई है. हर तरफ ‘बम-बम भोले’ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं और पैदल चल रहे कांवड़ियों के पैरों में बंधे घुंघरुओं की आवाज माहौल को भक्तिमय बना रही है.

सुरक्षा के लिए 6000 से ज्यादा जवान तैनात
कांवड़ मेले को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. पूरे मेला क्षेत्र को 18 सुपर जोन, 40 जोन और 141 सेक्टर में बांटा गया है. सुरक्षा व्यवस्था के लिए 6000 से ज्यादा पुलिस जवान और 13 पैरामिलिट्री कंपनियां तैनात की गई हैं. इसके अलावा पूरे क्षेत्र पर सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए नजर रखी जा रही है. पहली बार साइबर कमांडो की भी तैनाती की गई है, जो सोशल मीडिया पर नजर रखेंगे. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष यातायात योजना भी तैयार की गई है.

12 दिन तक चलेगा कांवड़ मेला 
हरिद्वार में हर साल दो बार कांवड़ मेला आयोजित होता है, लेकिन श्रावण मास का कांवड़ मेला सबसे खास माना जाता है. करीब 12 दिनों तक चलने वाले इस मेले में लाखों-करोड़ों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं. कांवड़ियों की भारी संख्या से हरिद्वार के व्यापारियों को भी बड़ा लाभ मिलता है और करोड़ों रुपये का कारोबार होता है. इस दौरान पूरी धर्मनगरी शिव भक्ति में डूब जाती है.

श्रावण में जल चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास में भगवान शिव को केवल एक लोटा गंगाजल अर्पित करने से भी वे प्रसन्न हो जाते हैं. यह महीना भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है. दक्षेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि श्रावण मास में यहां पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यही वजह है कि कांवड़िये हरिद्वार से जल लेने के बाद दक्षेश्वर महादेव में पूजा-अर्चना कर अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं.

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