दशहरे से लेकर दिवाली तक का समय ज्योतिषीय नजरिए से रिश्तों, पैसों और कामकाज के मामलों में जातकों के लिए काफी अहम रहने वाला है. इस दौरान शुक्र का तुला राशि में वक्री होना, सूर्य का तुला में गोचर और 24 अक्टूबर को बुध का वक्री होना ग्रह की गतिविधियों का प्रमुख हिस्सा है. महीने के आखिर में 31 अक्टूबर को गुरु के कर्क से सिंह राशि में जाने का भी ज्योतिषीय आकलन में महत्व रहेगा.
वैदिक ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, आकर्षण और सुख-सुविधाओं से, बुध को बातचीत और कारोबार से, जबकि गुरु को ज्ञान और विस्तार से जोड़कर देखा जाता है. इन ग्रहों की चाल के आधार पर पुराने रिश्तों में बातचीत दोबारा शुरू होने, आर्थिक योजनाओं की समीक्षा करने और काम में नए रास्ते तलाशने जैसे संकेत निकाले जा सकते हैं.
कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए दशहरे के बाद का समय आर्थिक मामलों पर ध्यान देने वाला रह सकता है. तुला राशि में शुक्र, सूर्य और फिर वक्री बुध की स्थिति को कन्या राशि से दूसरे भाव से जोड़कर देखा जाता है, जो धन, बचत और वाणी का भाव है. ऐसे में पुराने भुगतान, पैसों के लेन-देन या बजट से जुड़े मामलों की समीक्षा करने का मौका मिल सकता है. अगर कोई आर्थिक योजना लंबे समय से अटकी है, तो उसे आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं. हालांकि, 31 अक्टूबर को गुरु के सिंह राशि में जाने से कन्या राशि से उसका बारहवें भाव में गोचर होगा. इसलिए दिवाली तक खर्चों पर भी नजर बनाए रखना फायदेमंद होगा.
सिंह राशि
सिंह राशि वालों के लिए अक्टूबर का आखिरी हिस्सा खास होने वाला है. 31 अक्टूबर को गुरु के सिंह राशि में प्रवेश करने पर यह ग्रह आपकी राशि में गोचर करेगा. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, गुरु का यह बदलाव आत्मविश्वास, सीखने और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान बढ़ाने वाला होगा. वहीं, इससे पहले तुला राशि में सूर्य, शुक्र और बुध की स्थिति आपके साहस, संवाद और प्रयासों से जुड़े मामलों को सक्रिय कर सकती है. नौकरी या निजी जीवन में अपनी बात रखने का अवसर मिल सकता है. किसी नए काम की शुरुआत करने की सोच रहे हैं, तो पहले उसकी तैयारी और जरूरी जानकारी पर ध्यान दें.
धनु राशि
धनु राशि वालों के लिए तुला राशि में ग्रहों की सक्रियता को लाभ और सामाजिक संपर्कों से जुड़े ग्यारहवें भाव के संदर्भ में देखा जा सकता है. इस दौरान पुराने मित्रों या संपर्कों से बातचीत दोबारा शुरू होने और किसी पुराने काम को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है. नौकरी करने वालों को टीम या परिचितों के जरिए नई जानकारी मिल सकती है. 31 अक्टूबर को गुरु का सिंह राशि में जाना धनु राशि से नौवें भाव में उसका गोचर बनाएगा, जिसे भाग्य, उच्च शिक्षा और लंबी दूरी की योजनाओं से जोड़ा जाता है. किसी योजना को आगे बढ़ाने के लिए यह समय उपयोगी लग सकता है, लेकिन नतीजे आपकी परिस्थितियों पर भी निर्भर करेंगे.
तुला राशि
तुला राशि में शुक्र पहले से वक्री है और सूर्य के साथ बुध का गोचर भी इसी राशि में हो रहा है. वैदिक ज्योतिष में शुक्र को प्रेम और रिश्तों का कारक माना जाता है, इसलिए इस अवधि में पुराने संबंधों से दोबारा संपर्क हो सकता हैं. किसी पूर्व साथी से बातचीत शुरू होने या पुरानी गलतफहमी पर चर्चा होने की संभावना हो सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति का पुराना प्यार लौट आएगा. रिश्तों में आगे बढ़ने से पहले यह समझना जरूरी होगा कि पहले दूरी क्यों बनी थी. 31 अक्टूबर को गुरु के सिंह राशि में जाने से तुला राशि से उसके ग्यारहवें भाव में गोचर होगा, जिससे मित्रता, पुराने संपर्क में गहराई आएगी और लाभ के योग भी बनते दिखाई दे रहे हैं.
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