Badrinath Dham: चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है. बद्रीनाथ मंदिर के कपाट गुरुवार सुबह 6:15 बजे पूरे विधि-विधान के साथ भक्तों के लिए खोल दिया गया है. कपाट खुलते ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लग गया. आपको मालूम हो कि चारधाम यात्रा में चार तीर्थ स्थलों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ का दर्शन किया जाता है. केदारनाथ धाम का कपाट 22 अप्रैल को और गंगोत्री व यमुनोत्री के कपाट 19 अप्रैल 2026 को खुल चुके हैं. इस तरह से अब चारधाम की यात्रा पूरी तरह से चालू हो गई है. हम आज आपको बता रहे हैं बद्रीनाथ मंदिर का इतिहास और आप यहां कैसे पहुंच सकत हैं?
कहां मौजूद है बद्रीनाथ मंदिर
बद्रीनाथ मंदिर को बद्रीनारायण मंदिर भी कहा जाता है. यह मंदिर उत्तराखंड के बद्रीनाथ शहर में स्थित है. बद्रीनाथ धाम को भू बैकुंठ यानी धरती का बैकुंठ भी कहा जाता है. यह मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे नर और नारायण पर्वतों के बीच स्थित है.बद्रीनाथ मंदिर समुद्र तल से 10200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. मंदिर के ठीक सामने भव्य नीलकंठ चोटी है. बद्रीनाथ मंदिर जोशीमठ से लगभग 45 किमी की दूरी पर स्थित है.
कौन हैं भगवान बद्री विशाल
भगवान विष्णु स्वयं भगवान बद्री विशाल के रूप में बद्रीनाथ मंदिर में विराजमान हैं. गर्भ गृह में भगवान बद्री विशाल के साथ माता लक्ष्मी भी विराजमान हैं. मंदिर के गर्भ गृह में उद्धव जी और धनपति कुबेर भी हैं. पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार मां लक्ष्मी भगवान विष्णु से रूठ गईं और बैकुंठ से चली गईं तो भगवान विष्णु ने वर्तमान बद्रीनाथ धाम में आकर तपस्या की. माता लक्ष्मी जब शांत हुईं तो वो श्रीहरि को खोजते हुए यहां आईं तो देखा कि भगवान विष्णु बदरी के पेड़ों वाले वन में तपस्या कर रहे थे. बदरी का अर्थ है बेर का फल. मां लक्ष्मी ने तब भगवान विष्णु को बदरीनाथ कहा. इस तरह से इस स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा. धाम का अर्थ निवास स्थान से है यानी जिस जगर पर बद्रीनाथ का निवास हो. एक दूसरी कथा के मुताबिक बद्रीनाथ में भगवान विष्णु साधना में लीन थे तो उनको कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए मां लक्ष्मी ने बेरी के वृक्ष का रूप धारण कर लिया. इससे विष्णु जी प्रसन्न हुए और कहा कि इस स्थान को बद्रीनाथ के नाम से जाना जाएगा और यहां मेरे साथ आपकी भी पूजा होगी.
बद्रीनाथ मंदिर बंद रहने पर भी जलती रहती है अखंड ज्योति
बद्रीनाथ मंदिर साल के 6 महीने के लिए खुलता है और 6 महीने बंद रहता है. बद्रीनाथ धाम में जब बर्फबारी शुरू होती है तो 6 माह के लिए मंदिर का कपाट बंद कर दिया जाता है. मंदिर का कपाट बंद करते समय मंदिर में एक अखंड दीपक जला दिया जाता है. यह मंदिर जब बंद रहता है तब भी 6 महीने तक दीपक जलता रहता है. मंदिर का कपाट जब खोला जाता है यह अखंड ज्योति जलती हुई मिलती है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इन 6 महीनों में देवता भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और अखंड ज्योति को जलाए रखते हैं. बद्रीनाथ धाम को लेकर एक कहावत है कि जो जाए बदरी, वो न आए ओदरी. इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति एक बार बद्रीनाथ धाम चला जाता है, उसे जीवन और मरण से मोक्ष मिल जाता है, उसे फिर से माता के गर्भ में नहीं जाना पड़ता है.
बद्रीनाथ मंदिर का क्या है इतिहास
बद्रीनाथ मंदिर कितना पुराना है इसका कोई पुख्ता तथ्य नहीं है. इतिहास की किताबों के मुताबिक यह मंदिर वैदिक युग का है, जो लगभग 1500 ईसा पूर्व में शुरू हुआ था. इस मंदिर का उल्लेख कई वैदिक ग्रंथों, पुराणों में मिलता है. यह भी माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा किया गया था. शंकराचार्य 814 से 820 तक बद्रीनाथ मंदिर में रहे और उन्होंने केरल के एक नंबूदिरी ब्राह्मण को यहां का मुख्य पुजारी बनने के लिए कहा. आज भी ये परंपरा जारी है.
बद्रीनाथ धाम जाने के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी
आपको मालूम हो कि बद्रीनाथ धाम जाने के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है. आप ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीके से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं. ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन आप हरिद्वार, ऋषिकेश और सोनप्रयाग में जाकर करा सकते हैं. इसके लिए आधार कार्ड या कोई भी पहचान पत्र जरूरी होगा. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए आपको उत्तराखंड टूरिज्म की आधिकारिक वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर जाना होगा.
इसके अलावा गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से Tourist Care Uttarakhand मोबाइल ऐप डाउनलोड करके भी पंजीकरण किया जा सकता है.
कैसे जा सकते हैं बद्रीनाथ धाम
बद्रीनाथ धाम आप सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जा सकते हैं. यदि आप सड़क मार्ग से बद्रीनाथ धाम जाना चाह रहे हैं तो इसके लिए आपको दिल्ली के आईएसबीटी कश्मीरी गेट से बस पकड़कर हरिद्वार,ऋषिकेश या श्रीनगर पहुंचना होगा. इन जगहों से बद्रीनाथ के लिए सीधी बस और टैक्सी मिल जाती है. बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग 58 द्वारा गाजियाबाद से जुड़ा हुआ है. यदि आप रेल मार्ग से बद्रीनाथ धाम जाना चाह रहे हैं तो इसके लिए सबसे पास ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है. यहां पहुंचकर आप बस या टैक्सी से आसानी से बद्रीनाथ धाम जा सकते हैं. यदि आप हवाई मार्ग से बद्रीनाथ धाम जाना चाह रहे हैं तो सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है. वहां से टैक्सी लेकर आप बद्रीनाथ धाम जा सकते हैं.