600 साल से बिना बिजली जल रही अखंड ज्योति, गया का मंगला गौरी मंदिर क्यों है इतना खास? जानिए रहस्य और मान्यता

chaitra navratri 2026: बताया जाता है कि यह परंपरा करीब 600 वर्षों से लगातार चली आ रही है. मां मंगला गौरी मंदिर का वर्णन प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे वायु पुराण और पद्म पुराण में भी मिलता है. इन ग्रंथों के अनुसार, यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली और सिद्धिदायक माना गया है.

Mangla Gauri Temple
gnttv.com
  • गया,
  • 17 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:03 PM IST

बिहार के गया जिले के भस्मकूट पर्वत की चोटी पर स्थित मां मंगला गौरी मंदिर (Mangla Gauri Temple) देश के 51 महाशक्ति पीठों में से एक माना जाता है. इस मंदिर को पालनपीठ के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां माता सती का वक्ष (स्तन) गिरा था, जिसके कारण यह स्थान पवित्र और सिद्धपीठ माना जाता है.

गर्भगृह में नहीं जलती बिजली अखंड ज्योति से होता है उजाला
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके गर्भगृह में किसी भी प्रकार की बिजली की रोशनी का उपयोग नहीं किया जाता. यहां सदियों से एक अखंड ज्योति जल रही है, जिसकी रोशनी में ही श्रद्धालु माता के दर्शन करते हैं. मंदिर प्रबंधन ने गर्भगृह में बिजली जलाने पर पूरी तरह रोक लगा रखी है.

बताया जाता है कि यह परंपरा करीब 600 वर्षों से लगातार चली आ रही है. मां मंगला गौरी मंदिर का वर्णन प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे वायु पुराण और पद्म पुराण में भी मिलता है. इन ग्रंथों के अनुसार, यह स्थान अत्यंत शक्तिशाली और सिद्धिदायक माना गया है.

सती कथा से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
धार्मिक मान्यता के अनुसार, राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने भगवान शिव और माता सती को आमंत्रित नहीं किया. इससे आहत होकर माता सती यज्ञ में पहुंचीं, जहां उनका अपमान हुआ. अपमान से दुखी होकर माता सती ने यज्ञ कुंड में कूदकर देह त्याग दी. जब भगवान शिव को इसकी जानकारी मिली तो वे सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे. तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए. जहां-जहां उनके अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ स्थापित हो गए. माना जाता है कि गया में माता का वक्ष गिरा था, जिससे यह स्थान मंगला गौरी शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ.

ढक कर रखा जाता है वक्ष स्थल
मंदिर के गर्भगृह में माता के वक्ष स्थल को हमेशा ढककर रखा जाता है, इसी कारण इसे गुप्त शक्तिपीठ भी कहा जाता है. श्रद्धालु अखंड ज्योति की रोशनी में ही माता के दर्शन करते हैं.

हर दिन हजारों श्रद्धालु, नवरात्र में उमड़ती है भीड़
मां मंगला गौरी मंदिर में बिहार ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए आते हैं. आम दिनों में भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं. वहीं चैत्र नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब जाता है.

पुजारी ने बताया-600 साल से जल रही है ज्योति
मंदिर के पुजारी परिवार से जुड़े अकास जगदेव गिरी के अनुसार, यह बिहार का एकमात्र प्रमुख शक्तिपीठ है, जहां माता सती का वक्ष गिरा था. उन्होंने बताया कि यहां करीब 15वीं सदी से अखंड ज्योति जल रही है और आज तक यह परंपरा बिना रुके जारी है. इस स्थान को पालनपीठ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां बच्चों के लालन-पालन और समृद्धि की विशेष मान्यता है.

-पंकज कुमार की रिपोर्ट

ये भी पढ़ें:

 

Read more!

RECOMMENDED