गणेश उत्सव के दौरान महाराष्ट्र के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में भी अलग-अलग रंग और उत्साह देखने को मिल रहा है. राजधानी दिल्ली के गोविंदपुरी में भी गणेश उत्सव महाराष्ट्र की परंपरा के अनुसार मनाया जा रहा है. यहां भगवान गणेश की भव्य प्रतिमा 'दिल्ली का महाराजा' नाम से स्थापित की गई है, जहां भक्त 34 साल से इसी परंपरा के साथ गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं.
महाराष्ट्र से दिल्ली आए, पर नहीं छूटी परंपरा
गोविंदपुरी के भक्तों और आयोजकों के मुताबिक, वे मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले हैं. करीब 40 साल पहले वे दिल्ली के गोविंदपुरी में आकर बसे थे. दिल्ली में बसने के बाद भी उन्होंने महाराष्ट्र की गणेश उत्सव से जुड़ी परंपराओं को नहीं छोड़ा. भक्तों का कहना है कि इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पिछले 34 साल से गोविंदपुरी में गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित की जा रही है. यहां गणेश उत्सव महाराष्ट्र के तौर-तरीकों के अनुसार ही मनाया जाता है और पूजा-पाठ भी उसी परंपरा के मुताबिक होता है.
11 दिन तक होती है विधि-विधान से पूजा
गोविंदपुरी में स्थापित 'दिल्ली का महाराजा' गणपति की प्रतिमा के सामने 11 दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. आयोजकों के मुताबिक, इस दौरान रोजाना पूजा-पाठ चलता है. इस बार गणपति बप्पा का आगमन 14 सितंबर को बड़े ही धूमधाम के साथ किया गया था. इसके बाद से लगातार पूजा-अर्चना की जा रही है. भक्तों के लिए गणपति उत्सव केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि अपनी पुरानी परंपरा से जुड़े रहने का भी जरिया है.
आगमन की तरह विदाई भी होगी खास
आयोजकों ने बताया कि इस बार गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर को होगा. इस मौके पर सुंदर शोभायात्रा निकाली जाएगी और गणपति बप्पा को भव्य तरीके से विदाई दी जाएगी. भक्तों का कहना है कि जिस तरह गणपति का आगमन धूमधाम से किया जाता है, उसी तरह विदाई की तैयारी भी खास तरीके से की जाती है. शोभायात्रा के बाद गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा.
हरिद्वार ले जाकर करेंगे गणपति का विसर्जन
गोविंदपुरी के 'दिल्ली का महाराजा' गणपति का विसर्जन स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि अपनी परंपरा के अनुसार हरिद्वार ले जाकर किया जाएगा. आयोजकों के मुताबिक, प्रतिमा को हरिद्वार ले जाकर गंगा जी से लगे हुए घाट पर विसर्जित किया जाएगा. इस तरह दिल्ली में रहने के बावजूद महाराष्ट्र से आए ये परिवार 34 साल से गणपति उत्सव के जरिए अपनी परंपरा और पूजा-पद्धति को आगे बढ़ा रहे हैं. गोविंदपुरी में स्थापित 'दिल्ली का महाराजा' इसी जुड़ाव और परंपरा की तस्वीर पेश करता है.
ये भी पढ़ें