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Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि में बरसेगी मां दुर्गा की कृपा, ज्योतिषी Shailendra Pandey ने बताया नौ दिनों का महत्व और मनोकामना को पूर्ण करने का उपाय

Navratri 2026: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग- अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है. हर स्वरूप से विशेष तरह का वरदान मिलता है. इसके साथ ही ग्रहों की बाधा समाप्त हो जाती है. इस बार नवरात्रि 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक रहेगी.

Shardiya Navratri 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:45 PM IST

नवरात्रि (Navratri) वर्ष में चार बार पड़ती है. माघ, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन में नवरात्रि मनाई जाती है.  ज्योतिषी शैलेंद्र पांडेय ( Shailendra Pandey) ने बताया कि नवरात्रि से वातावरण के तमस का अंत होता है और सात्विकता की शुरुआत होती है. मन में उल्लास, उमंग और उत्साह की वृद्धि होती है. दुनिया में सारी शक्ति, नारी या स्त्री स्वरूप के पास ही है, इसलिए नवरात्रि में देवी की उपासना ही की जाती है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग- अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है. हर स्वरूप से विशेष तरह का वरदान मिलता है. इसके साथ ही ग्रहों की बाधा समाप्त हो जाती है. इस बार नवरात्रि 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक रहेगी.

कलश की स्थापना कैसे करें? 
घर के उत्तर पूर्व या पूर्व दिशा में एक चौकी या ऊंचा आसन स्थापित करें. इस पर लाल कपड़ा बिछाएं, उसके ऊपर मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. इसके बाद एक मिट्टी का कलश स्थापित करें. कलश में जल और एक सिक्का डालें. कलश के मुख पर मौली से बंधा हुआ नारियल रखें. कलश के ऊपर मिट्टी लगाकर उसमे जौ भी बो सकते हैं या अलग से वेदी बनाकर उसमे जौ बोयें. कलश की स्थापना के साथ एक अखंड दीपक जला दें.  

इस बार देवी के आगमन से क्या मिल रही सूचना?
हर बार देवी का आगमन किसी विशेष वाहन पर होता है. इससे आने वाले समय के बारे में अनुमान लगाया जाता है. इस बार देवी का आगमन हाथी पर हो रहा है. यह सम्पन्नता, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है. लोगों के जीवन में शांति और आनंद आएगा. 

क्या है कलश स्थापना का मुहूर्त? 
कलश की स्थापना आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को की जाती है. इस बार प्रतिपदा तिथि 11 अक्टूबर को रात्रि 09.30 तक रहेगी. इसलिए कलश की स्थापना इसके पूर्व कर लेनी होगी. सबसे अच्छा समय प्रातः 06.18 से प्रातः 10.11 के बीच का है. इसके अलावा दोपहर 11.44 से 12.30 के बीच भी कलश स्थापना की जा सकती है. 

नवरात्रि के प्रथम दिन देवी के किस स्वरूप की उपासना 
प्रथम दिन, नवदुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होती है. इनकी पूजा से संकल्प शक्ति और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. इस दिन मां की उपासना लाल फूलों से करनी चाहिए. इस दिन देवी कवच का पाठ करना अच्छा रहता है. इसके साथ ही उन्हें गाय के दूध का शुद्ध घी अर्पित करना चाहिए. 

क्या नवरात्रि में केवल माता दुर्गा की ही उपासना की जा सकती है 
नवरात्रि शक्ति प्राप्त करने का पर्व है, इसलिए नवरात्रि में मां दुर्गा या शक्ति के किसी भी स्वरूप की उपासना की जा सकती है. नवदुर्गा की सामान्य साधना या दस महाविद्या की तंत्र साधना भी की जा सकती है. 

नवरात्रि में किसी भी मनोकामना को पूर्ण करने का उपाय
अपने उम्र के बराबर लौंग ले लें. लाल धागे में बांधकर माला की तरह बना लें. इस माला को मां दुर्गा के गले में पहना दें. अपनी मनोकामना पूर्ण हो जाने की प्रार्थना करें.


 

 

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