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Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand: कॉलेज में चुनाव लड़ने वाले उमाशंकर उपाध्याय कैसे बन गए ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जानें पूरी कहानी

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बचपन का नाम उमाशंकर उपाध्याय है. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भी पैतृक गांव में ही हुई थी. उसके बाद वो वाराणसी में पढ़ाई की. इस दौरान वो छात्र राजनीति में एक्टिव रहे. साल 2003 में उन्होंने संन्यास ग्रहण किया.

Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 19 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:37 PM IST

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या महास्नान पर्व पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई. इसके बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम स्नान से वंचित हो गए. जिसको लेकर मामला गरम हो गया है. धर्मगुरु अविमुक्तेश्वरानंद पहले भी अपनी तीखी टिप्पणियों को लेकर चर्चा में रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं कि यूपी के प्रतापगढ़ के रहने वाले उमाशंकर उपाध्याय कैसे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बन गए.

कौन हैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?
अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती स्वतंत्रता सेनानी थे. साल 2022 में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का निधन हो गया. इसके बाद ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बनाया गया था. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आधे-अधूरे राम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा पर भी सवाल खड़े किए थे.

कैसे मिला अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती नाम?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बचपन का नाम उमाशंकर उपाध्याय था. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में ब्राह्मणपुर गांव में 15 अगस्त 1969 को हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भी प्रतापगढ़ में ही हुई. इसके बाद वो गुजरात चले गए. उमाशंकर स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य ब्रह्मचारी राम चैतन्य के संपर्क में आए. उनकी सलाह पर उमाशंकर ने संस्कृत की पढ़ाई शुरू की. उन्होंने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की शिक्षा ग्रहण की.

उमाशंकर छात्र राजनीति में रहे सक्रिय-
बनारस में पढ़ाई के दौरान उमाशंकर उपाध्याय सियासत में भी सक्रिय रहे. उन्होंने छात्र राजनीति में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. उन्होंने साल 1994 में छात्रसंघ का चुनाव लड़ा था. 

शंकराचार्य की पदवी मिलने के बाद भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लगातार राजनीतिक बयानबाजी के लिए चर्चा में रहे हैं. उन्होंने साल 2019 लोकसभा चुनाव में वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ उम्मीदवार उतारने की कोशिश की थी. उन्होंने साल 2024 लोकसभा चुनाव में वाराणसी से उम्मीदवार भी उतारा था. हालांकि उसको ज्यादा समर्थन नहीं मिला.

उमाशंकर ने ली संन्यास की दीक्षा-
15 अप्रैल 2003 को दंड संन्यास की दीक्षा दी गई. इसके बाद उनको अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती नाम मिला. इसके बाद वो हिंदू धर्म की रक्षा और प्रचार-प्रसार में जुट गए. उन्होंने साल 2008 में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने के लिए अनशन किया था. सितंबर 2022 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को जोठीमठ के ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य नियुक्त किया गया.

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