ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय... एक ऐसा मंत्र है, जिसे हम बचपन से सुनते और बोलते आ रहे हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि, ॐ नमः शिवाय सिर्फ शांति पाने का मंत्र नहीं है. यह एक गहरा सत्य स्वीकार करने का साहस है. यह मंत्र हमें जीवन से भागने नहीं, बल्कि जीवन को वैसे ही देखने की शक्ति देता है जैसा वह है. हममें से कई लोग आज भी इस मंत्र का जाप करने के बाद भी इसका मतलब नहीं जानते. तो चलिए आज आपको बताते हैं कि ॐ नमः शिवाय का असल में मतलब क्या है.
शिव कौन हैं
भगवान शिव वह शक्ति हैं जो मनुष्य को वास्तविकता का सामना करने के लिए बदलती हैं. वे अनावश्यक चीजों को हटाकर जीवन को सरल बनाते हैं. यही कारण है कि शिव की आराधना को आसान नहीं माना गया है. शैव परंपरा में शिव को अहंकार का नाशक कहा गया है. अहंकार वह झूठी पहचान जो हम अपने नाम, पद, उपलब्धियों और सामाजिक भूमिका से जोड़ लेते हैं. ॐ नमः शिवाय का जाप करने का अर्थ है, अपने इसी झूठे 'मैं' को चुनौती देना. यह प्रक्रिया अक्सर असहज होती है, क्योंकि अहंकार टूटना आसान नहीं होता.
आराम नहीं, सत्य की मांग
शिव को सत्य स्वरूप कहा गया है. सत्य हमेशा आरामदायक नहीं होता. जब कोई व्यक्ति इस मंत्र का जाप करता है, तो वह अपने रिश्तों, इच्छाओं और भ्रमों को साफ-साफ देखने की तैयारी करता है. शिव पुराण सहित कई ग्रंथों में शिव को अज्ञान जलाने वाला बताया गया है, न कि वास्तविकता से बचाने वाला.
अज्ञान के नाश की प्रक्रिया
हिंदू दर्शन में अज्ञान का मतलब जानकारी की कमी नहीं, बल्कि अविद्या, अस्थायी चीजों से खुद को जोड़ लेना है. न, म, शि, व, य... ये पांच अक्षर पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) के प्रतीक माने जाते हैं. मंत्र जाप के जरिए इन तत्वों की शुद्धि और चेतना का संतुलन माना गया है.
आसक्ति से मुक्ति का संकेत
शिव वैराग्य के प्रतीक हैं. श्मशान में वास, भस्म धारण और सुख-दुख से परे रहना, ये सभी प्रतीक बताते हैं कि जीवन में पकड़ ढीली करना जरूरी है. ॐ नमः शिवाय का अर्थ है परिणाम, व्यक्ति और पहचान से अत्यधिक जुड़ाव छोड़ना. यह उदासीनता नहीं, बल्कि निर्भरता से आजादी है.
कर्मों की शुद्धि
शैव मान्यता के अनुसार शिव कर्मों से बंधे नहीं हैं, लेकिन उनके समाधान के अधिपति हैं. मंत्र जाप से कर्म जल्दी सामने आते हैं, ताकि उनसे सीख ली जा सके. कई बार इससे जीवन में उथल-पुथल होती है, लेकिन इसे दंड नहीं, शुद्धि माना गया है.
पलायन नहीं, आंतरिक स्थिरता
शिव योगेश्वर हैं, ध्यान के स्वामी हैं. उनका मौन निष्क्रिय नहीं, बल्कि पूर्ण जागरूकता है. इस मंत्र का जाप मन को परिस्थितियों से नहीं, बल्कि प्रतिक्रिया से मुक्त करता है. वेदों के अनुसार सच्ची शांति हालात बदलने से नहीं, मन को साधने से आती है.
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