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Pandit Shailendra Pandey on Dhumavati: पंडित शैलेंद्र पांडेय से जानें कि कौन हैं मां धूमावती, क्या घर की औरतों को करनी चाहिए इनकी पूजा?

दस महाविद्याओं की सातवीं शक्ति मां धूमावती का प्राकट्य की मान्यता और उनका स्वरूप काफी अनोखा है. पंडित शैलेंद्र पांडे बताते हैं कि कौवे पर सवार और सूप धारण करने वाली मां धूमावती की पूजा के नियम बेहद कड़े हैं. हालांकि फिर भी महिलाओं के लिए पूजा को लेकर अलग मान्यता है.

मां धूमावती के लेकर पं. शैलेंद्र पांडेय ने क्या कहा?
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 17 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:56 PM IST

दस महाविद्याओं के अलग-अलग स्वरूपों में मां धूमावती का स्वरूप काफी अलग माना जाता है. पंडित शैलेंद्र पांडे ने मां धूमावती की उत्पत्ति, उनके स्वरूप, महिमा और पूजा से जुड़े नियमों के बारे में बताया है. उनके मुताबिक, मां धूमावती दस महाविद्याओं की सातवीं महाविद्या हैं. उनकी पूजा को लेकर कुछ विशेष सावधानियां भी बताई गई हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि मां धूमावती कौन हैं, क्या बहू और बेटियां कर सकती हैं पूजा? और जानें कि उनकी पूजा को लेकर पंडित जी ने क्या कहा है.

दक्ष यज्ञ में सती के शरीर से निकले धुएं से हुआ मां धूमावती का प्राकट्य
पंडित शैलेंद्र पांडे के मुताबिक, मां धूमावती दस महाविद्याओं का सातवां स्वरूप हैं. मान्यता है कि दक्ष यज्ञ के दौरान जब माता सती ने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए, तब उनके भस्म होते शरीर से निकले धुएं से मां धूमावती का प्राकट्य हुआ. दुख और कष्ट के समय में धुएं से उत्पन्न होने के कारण उनके स्वरूप को शोक, दुख और भय से जोड़कर देखा जाता है. पंडित शैलेंद्र पांडे बताते हैं कि मां धूमावती को दरिद्रा, ज्येष्ठा और अलक्ष्मी भी कहा जाता है. उनके मुताबिक, आलस्य, अशुभता और दरिद्रता पर मां धूमावती का आधिपत्य माना जाता है. यही वजह है कि उनके स्वरूप को सामान्य देवी-स्वरूपों से अलग माना जाता है.

कौवे पर सवार और हाथ में सूप धारण करती हैं मां धूमावती
मां धूमावती के स्वरूप का वर्णन करते हुए पंडित शैलेंद्र पांडे बताते हैं कि वह कौवे पर सवार रहती हैं और उनके हाथ में अनाज फटकने वाला सूप होता है. उन्हें वैधव्य के स्वरूप में दर्शाया जाता है. उनके स्वरूप में शोक और दुख दिखाई देता है, इसलिए भी उन्हें दुख और भय से जोड़कर देखा जाता है.

क्या घर की औरतों को नहीं करनी चाहिए मां धूमावती की पूजा?
पंडित शैलेंद्र पांडे के मुताबिक, मां धूमावती की पूजा के नियम दूसरे देवी-स्वरूपों से अलग माने जाते हैं. उन्होंने बताया कि बिना गुरु के निर्देश और किसी विशेष आवश्यकता के मां धूमावती की पूजा नहीं करनी चाहिए. उनके अनुसार, महिलाओं को मां धूमावती के दर्शन और पूजन से सख्ती से बचना चाहिए. उन्होंने महिलाओं के लिए सामान्य रूप से यह सावधानी बताई है.

मां धूमावती की पूजा से दुख और दरिद्रता दूर होने की मान्यता
पंडित शैलेंद्र पांडे बताते हैं कि मां धूमावती का स्वरूप भले ही दुख देने वाला माना जाता हो, लेकिन मान्यता है कि उनकी पूजा से दुख और दरिद्रता का नाश होता है. उनकी उपासना को शत्रुओं और विरोधियों से मुक्ति पाने से भी जोड़ा जाता है. उनके मुताबिक, जो लोग गलत रास्ते पर चले जाते हैं, कुमार्ग पर चलने लगते हैं या नशे में लिप्त हो जाते हैं, उनके लिए मां धूमावती की उपासना लाभकारी है. उनकी पूजा से जीवन की बाधाएं दूर होने और इसका फल जल्दी मिलने की मान्यता भी है.

किन परिस्थितियों में करनी चाहिए मां धूमावती की पूजा?
पंडित शैलेंद्र पांडे के अनुसार, मां धूमावती की उपासना विशेष परिस्थितियों में ही करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो, उनकी पूजा करने से बचना चाहिए. उनके मुताबिक, जब जीवन में दरिद्रता से छुटकारा नहीं मिल रहा हो और दुख खत्म होने का नाम न ले रहा हो, तब मां धूमावती की पूजा करने की बात कही गई है. इस तरह पंडित शैलेंद्र पांडे ने मां धूमावती की उत्पत्ति, उनके स्वरूप और पूजा से जुड़ी सावधानियों के बारे में बताया. उनके कथन के अनुसार, महिलाओं को लेकर सामान्य सावधानी का जिक्र है, लेकिन बहू और बेटियों के लिए अलग-अलग नियम नहीं बताए गए हैं.
 

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