सावन के पवित्र माह में मुंगेर के असरगंज कच्ची कांवरिया पथ पर आस्था का सैलाब उमड़ रहा है. कांवरिया पथ पूरी तरह भगवामय हो चुका है. बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा मार्ग गूंज रहा है. लाखों शिवभक्त सुल्तानगंज उत्तरवाहिनी गंगातट से गंगाजल भरकर 105 किलोमीटर पैदल यात्रा कर झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक करने जा रहे हैं.
...तो सारी थकान हो जाती है दूर
असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर झारखंड के धनबाद जिले के भूली निवासी अजय विश्वकर्मा इस बार अपने अनोखे डमरू रूपी कांवड़ की वजह से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गए. कांवड़िया पथ पर जैसे ही उनका डमरू के आकार का कांवड़ नजर आया, उसके बाद श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई. अजय ने बताया कि इस कांवड़ को बनाने में बहुत समय और मेहनत लगी है. इस डमरू का पूरा ढांचा लकड़ी और फाइबर से तैयार किया गया है. जब रास्ते में लोग इस कांवड़ को देखकर जयकारा लगाते हैं और आशीर्वाद देते हैं तो सारी थकान दूर हो जाती है. हम पिछले सात वर्षों से सुल्तानगंज से पैदल बाबाधाम जा रहे हैं और इस बार महादेव के प्रिय वाद्य यंत्र डमरू के स्वरूप में कांवड़ बनाने का संकल्प लिया.
कठिन तपस्या को देखकर हर कोई नतमस्तक
पश्चिम बंगाल के राजकुमार महतों हाथों के बल बाबाधाम की यात्रा पर निकले हैं. उन्होंने यह यात्रा बिच्छू के आकार में दोनों पैरों को ऊपर कर हाथ के बल महादेव को जलाभिषेक करने जा रहे हैं. उनकी इस कठिन तपस्या को देखकर हर कोई नतमस्तक हो गया. राजकुमार ने बताया कि पिछले दो वर्षों से पूरे भारत की धार्मिक यात्रा कर रहे हैं. इस दौरान 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम और 51 शक्तिपीठों में से 21 शक्तिपीठों का दर्शन कर चुके हैं. इसके अलावा मथुरा, वृंदावन, खाटू श्याम, सालासर बालाजी, मेहंदीपुर बालाजी, जीण माता, तुंगनाथ, बागेश्वर धाम, चित्रकूट और अनुसूइया माता मंदिर सहित अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा कर चुके हैं.
बिच्छू बम के रूप में कर रहे दूसरी बार यात्रा
उन्होंने बताया कि पिछले साल से सुल्तानगंज से बैजनाथधाम की यात्रा हाथों के बल बिच्छू यात्रा कर रहे हैं. इस तरह बिच्छू बम के रूप में इस बार दूसरी यात्रा है. पिछले साल इस यात्रा को पूरा करने में एक महीने का वक्त लगा था और इस बार 12वें दिन असरगंज पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि अकेले यात्रा करने और साथ में साइकिल लेकर चलने के कारण इस बार उनकी रफ्तार थोड़ी धीमी है लेकिन हौसला बुलंद है. उन्होंने बताया कि जब बागेश्वर धाम गए थे तो मुझे एक अलग शक्ति का अनुभव हुआ और तभी लगा कि और अधिक मंदिरों के दर्शन करें व लोगों को आस्था का संदेश दें. हम एक बार में लगभग 60 से 70 फीट तक हाथों के बल चलते हैं और मुझे कोई परेशानी नहीं होती है. बाबा भोलेनाथ की कृपा और उनके प्रति हमारी श्रद्धा का परिणाम है कि इस कठिन यात्रा को हम पूरी करते हैं. उन्होंने बिहार और झारखंड सरकार से अपील करते हुए कहा कि बंगला सावन की शुरुवात सावन से पहले हो जाती है और शुरुवाती दिनों में बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन और ठहरने की सुविधा नहीं मिल पाती है. यदि सरकार व्यवस्थाएं बंगला सावन से ही शुरू कर दें तो बंगाल के हजारों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिल जाएगी.