Ujjain Nagchandreshwar Temple Importance कालों के काल महाकाल और उज्जैन के राजा के दर्शन करने के बारे में कौन नहीं सोचता. उनके दर्शन मात्र से कई जन्मो के कर्म सुधर जाते हैं और मुक्ति प्राप्त होती है. 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा महाकाल का दरबार अपने हर भक्त के लिए खुला रहता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में भगवान शिव के अलग-अलग रूप भी विराजमान हैं. इन्हीं में से एक हैं नागचंद्रेश्वर महादेव. आज नाग पंचमी है और इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं.
महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर विराजते हैं नागचंद्रेश्वर
नागचंद्रेश्वर मंदिर महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है. मंदिर के गर्भगृह के ऊपर ओंकारेश्वर और उसके शीर्ष पर भगवान नागचंद्रेश्वर का मंदिर स्थापित है. यहां भगवान शिव की ऐसी प्रतिमा विराजमान है, जिसमें वह नाग के फन के नीचे बैठे हुए दिखाई देते हैं. भगवान शिव और नाग के इसी स्वरूप की वजह से इस मंदिर का संबंध नाग पूजा और नाग पंचमी से खास तौर पर जुड़ा हुआ है. यहां भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा की जाती है. नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर जल, फूल और बेलपत्र अर्पित करते हैं और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करते हैं.
साल में सिर्फ नाग पंचमी पर खुलते हैं कपाट
नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे खास बात इसके कपाट खुलने की परंपरा है. मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार नाग पंचमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं. बाकी पूरे साल मंदिर के कपाट बंद रहते हैं. इसलिए नाग पंचमी के दिन यहां दर्शन करने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है. लोग लंबी कतार में लगकर भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करते हैं.
पूरे विश्व में नहीं है ऐसी प्रतिमा, नेपाल से लाई गई थी मूर्ति
श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है. इस प्रतिमा में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय, नंदी, 7 फन वाले नागराज, सिंह और सूर्य-चंद्रमा भी बने हुए हैं. यहां श्रद्धालुओं को एक साथ पूरे शिव परिवार के दर्शन करने को मिलते हैं. प्रतिमा में भगवान भोलेनाथ शेष शैय्या पर विराजमान हैं. बताया जाता है कि यह प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी. ऐसी मान्यता है कि उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है. इस प्रतिमा के दर्शन के बाद अंदर प्रवेश करने पर भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के शिवलिंग स्वरूप के दर्शन होते हैं.
नागचंद्रेश्वर पूजा का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यता में नागचंद्रेश्वर की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है. नाग पंचमी पर भगवान शिव और नाग देवता की आराधना कर भक्त सुख-शांति, परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हैं. भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं और हिंदू धर्म में नाग देवता की भी विशेष धार्मिक मान्यता है. हिंदू धर्म में सदियों से नागों की पूजा करने की परंपरा रही है. हिंदू परंपरा में नागों को भगवान शिव का आभूषण भी माना गया है. सोमवार के दिन नाग पंचमी का पर्व होने से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.
उज्जैन के राजा हैं बाबा महाकाल
उज्जैन में बाबा महाकाल को राजा माना जाता है. यही वजह है कि यहां बाबा महाकाल की आरती और पूजा की अपनी अलग परंपराएं हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब उज्जैन के राजा महाकाल हैं तो कोई दूसरा राजा यहां रात में रुककर विश्राम नहीं करता. इसी आस्था के कारण उज्जैन में रात रुकने को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. बाबा महाकाल को उज्जैन का अधिपति और नगर का राजा माना जाता है.
नाग पंचमी पर बढ़ जाता है मंदिर का महत्व
नाग पंचमी के दिन जब साल में एक बार नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलते हैं तो भक्तों के लिए यह मौका बेहद खास हो जाता है. महाकाल की नगरी में भगवान शिव के इस अलग स्वरूप के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. नागचंद्रेश्वर मंदिर की यही खास परंपरा इसे उज्जैन के धार्मिक स्थलों में एक अलग पहचान देती है. महाकाल के दरबार में मौजूद भगवान शिव के इस स्वरूप के दर्शन के लिए भक्त पूरे साल नाग पंचमी का इंतजार करते हैं.
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